August 17, 2026
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  • ड्रोन बताएगा अवैध निर्माण-खनन

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा में अब ड्रोन तकनीक सुशासन का अहम हिस्सा बनेगी। अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध खनन, प्रदूषण और पुराने कचरा स्थलों की निगरानी एआई आधारित सिस्टम और हाई रेजोल्यूशन ड्रोन इमेजरी से की जाएगी। इससे सरकारी विभागों को मौके की सटीक स्थिति का डिजिटल डेटा मिलेगा और कार्रवाई भी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को ड्रोन इमेजिंग एंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ हरियाणा (दृश्या) के निदेशक मंडल की बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाएं तय समय में पूरी करने के निर्देश दिए।

बैठक में एआई आधारित चेंज डिटेक्शन एप्लीकेशन की प्रगति की समीक्षा हुई। यह सिस्टम हाई रेजोल्यूशन ड्रोन तस्वीरों के जरिए अवैध निर्माण और अतिक्रमण की स्वत: पहचान करेगा। फरीदाबाद, हिसार, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में करीब 800 वर्ग किमी क्षेत्र का डिजिटल मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। इससे शहरी नियोजन, निगरानी और प्रवर्तन के लिए प्रदेश का बड़ा जियोस्पेशियल डेटाबेस तैयार हो रहा है।

गुरुग्राम में 60 हजार मैनहोल-गली ट्रैप की मैपिंग

गुरुग्राम में नगर निगम की परिसंपत्तियों की डिजिटल मैपिंग भी की जा रही है। इसमें सड़क नेटवर्क, फुटपाथ, सेंट्रल वर्ज और बर्म का डिजिटलीकरण किया गया है। करीब 60 हजार मैनहोल और गली ट्रैप की सेंटीमीटर स्तर की सटीकता से जियो-रेफरेंसिंग की जा रही है। इससे शहरी अवसंरचना के रखरखाव, योजना बनाने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।

खानक खदान पर हर महीने ड्रोन की नजर

खानक स्टोन माइंस में ड्रोन से मासिक निगरानी की जा रही है। अब तक सर्वे के 8 चरण पूरे हो चुके हैं, जबकि 6 चरणों की वॉल्यूमेट्रिक असेसमेंट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इससे खनन की वास्तविक मात्रा का वैज्ञानिक और सटीक आकलन किया जा सकेगा।

16 नगर परिषदों में पुराने कचरे का सर्वे

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत लिगेसी वेस्ट साइट्स का ड्रोन से वॉल्यूमेट्रिक आकलन किया जा रहा है। प्रदेश की 16 नगर परिषदों में सर्वे पूरा कर रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। इससे पुराने कचरे के वैज्ञानिक उपचार और लैंडफिल प्रबंधन में मदद मिलेगी।

नालों पर भी ड्रोन और थर्मल कैमरों से नजर

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए प्रमुख नालों का ड्रोन सर्वे, थर्मल इमेजिंग और वीडियोग्राफी कराई जा रही है। इसका मकसद अवैध सीवेज डिस्चार्ज पॉइंट की पहचान, प्रदूषण वाले संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और पर्यावरणीय उल्लंघनों पर कार्रवाई करना है। कई प्रमुख नालों का सर्वे पूरा हो चुका है।