- बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष भी रहे
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक सहीराम धारणिया का 104 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार सुबह 4 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिवार और रिश्तेदार पहुंचने लगे।
सिरसा जिले के सकत्ता खेड़ा गांव में आज दोपहर को उनका बिश्नोई समाज की रीति के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनकी बेटी जोधपुर से आएगी।
सहीराम धारणिया वर्ष 1957 में अबोहर विधानसभा से जनसंघ से विधायक बने थे। वे बिश्नोई समाज से विधायक बनने वाले पहले व्यक्ति थे। इसके अलावा, वे लगातार 40 साल तक अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष रहे। उन्हें अखबार पढ़ने का बहुत शौक था और उन्होंने लंबे समय तक वकालत भी की।
बिश्नोई महासभा, हिसार के प्रधान जगदीश कड़वासरा ने बताया- सहीराम धारणिया जी के चले जाने से समाज में एक बड़ी कमी महसूस होगी और हर कोई दुखी है। उन्होंने समाज को आगे बढ़ाने में बहुत योगदान दिया। हरियाणा ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी महासभा के प्रतिनिधि व अन्य लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।
पाकिस्तान से लाए थे 14-15 हजार लोगों का जत्था
लॉर्ड शिवा कॉलेज के संचालक एवं सहीराम धारणिया के दोहते सोमप्रकाश ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके नाना का जन्मस्थान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर रियासत में तालिया गांव है। देश के बंटवारे के बाद वे भारत आ गए और उन्होंने “गहने बेचो, हथियार खरीदो” नामक एक अभियान भी चलाया।
वह पाकिस्तान से लगभग 14 से 15 हजार लोगों का जत्था लेकर भारत आए थे। उन्होंने उनका पुनर्वास भी करवाया। उन लोगों का क्लेम डालकर सरकार से दिलवाया और खुद का क्लेम 20 साल बाद डाला था। उन्हें और उनके परिवार को सिरसा जिले के सकताखेड़ा में जमीन अलॉट हुई। तब से गांव में उनका घर है और वे यहीं रहते थे।
लाहौर से की थी लॉ डिग्री
सोमप्रकाश ने आगे बताया कि उनके नाना सहीराम धारणिया ने शुरुआती पढ़ाई पंजाब प्रांत के मोगा में की। उन्होंने लाहौर पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की और बंटवारे के बाद यूनिवर्सिटी शिमला से चंडीगढ़ आ गई। वे डबवाली के सकताखेड़ा में सन 1948 में आकर बसे थे।
वर्ष 1957 में उन्होंने अबोहर से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और वे जीत भी गए। इसके बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और समाज सेवा में जुट गए। 1950 में उन्हें अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा का सचिव बनाया गया। 20 साल तक उन्होंने यह जिम्मेवारी संभाली। इसके बाद 20 साल वह अध्यक्ष रहे। उन्होंने हिंदी आंदोलन में योगदान दिया और वे जेल भी गए। वे लॉर्ड शिवा कॉलेज के संरक्षक भी रहे।
पत्नी का 10 साल पहले देहांत हुआ
सहीराम धारणिया के परिवार में दो बेटे- रघुबीर और सतपाल सिंह, और दो बेटियां हैं। दोनों बेटे खेतीबाड़ी करते हैं। उनके तीन पौते हैं( रघुवीर का एक बेटा है और सतपाल के दो बेटे हैं। उनके एक तीसरे बेटे और एक बेटी की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। उनकी दूसरी बेटी की शादी राजस्थान के जोधपुर में हुई है। उनकी पत्नी रामेश्वरी देवी का देहांत 10 साल पहले हो गया था।
12 जनवरी को आखिरी जन्मदिन मनाया
सोमप्रकाश ने बताया कि नाना हर साल अपना जन्मदिन खुशी के साथ मनाते थे। बीती 12 जनवरी को आखिरी जन्मदिन मनाया था। वे सादा जीवन जीते थे और चिंता मुक्त रहते थे। खेतीबाड़ी खुद करते थे। यहीं उनके सेहतमंद होने का राज है।