October 23, 2026
23 oct 2
  • मोर्चा तैयार, 15 जिले प्रभावित, लोग बिजली-पानी को तरसे

गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का लाइसेंस देने के विरोध में चल रही हड़ताल को देखते हुए सरकार बैकफुट पर आ गई है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर कर्मचारियों को बातचीत का न्योता देते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लिखा-

हरियाणा के हड़ताल पर गए कर्मचारियों से अपील हड़ताल खत्म कर ड्यूटी पर आयें । सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए हम तैयार हैं । इसमें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 पर कार्यवाही करना भी शामिल है ।

मंत्री के इस बुलावे को बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्वीकार कर लिया है।  प्रवक्ता रविन्द्र घनघस ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मंत्री विज की तरफ से हमें बातचीत का निमंत्रण मिला है। दोपहर 3 बजे यह बैठक रेस्ट हाउस में होगी।

उनका कहना है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार प्राइवेट कंपनी के लाइसेंस को रद्द कर सकती है। यह पूरा मामला सीएम की सहमति के बिना नहीं हो सकता।

बता दें कि हड़ताल के पहले दिन 15 जिलों में इसका असर दिखा। 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से ज्यादा फीडरों में ब्रेकडाउन हुआ। शुक्रवार यानी दूसरे दिन भी हालात जस के तस बने हुए हैं। हिसार के पॉश इलाकों में 24 घंटे से बिजली गुल है। झज्जर में सीएनजी पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए हैं। वहीं, कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने कोर्ट का काम सस्पेंड रखने का फैसला किया है।

मंत्री विज बोले- कर्मचारियों से 3 बजे मीटिंग

बिजली मंत्री अनिल कहा कि मैंने अभी कर्मचारी नेताओं से बात भी की है। मैं पहले दिन से उनको कह रहा हूं कि हड़ताल इसका रास्ता नहीं है। आप आओ, टेबल पर हम बात करते हैं और अगर आप कोई और रास्ता सुझाओगे, हम उसको भी अपनाएंगे।

तो कल गुरुवार को उनकी तरफ से यह मांग आई थी कि सरकार धारा 108 का इस्तेमाल करके इस आदेश को खारिज कर दे, जो कि हम कर सकते हैं। मैंने मुख्यमंत्री जी से भी बात कर ली है और आज मैंने सुबह उठते ही ट्वीट भी कर दिया था कि हम धारा 108 इस्तेमाल करेंगे। जो यूनियन के नेता हैं, वो मान गए हैं और 3 बजे पंचकूला रेस्ट हाउस में उन्होंने आकर मीटिंग करने के लिए सहमति दी है। और मुझे विश्वास है कि चंद घंटों में ही हड़ताल खत्म हो जाएगी।

कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के महासचिव रविंद्र घगघस ने जानकारी देते हुए बताया कि बिजली मंत्री अनिल विज की तरफ हमें बातचीत का निमंत्रण मिला है। दोपहर 3 बजे यह मीटिंग रेस्ट हाउस में होगी। जहां तक प्राइवेट कंपनी को पेरेलल लाइसेंस दिए जाने की बात है तो इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार प्राइवेट कंपनी के लाइसेंस को रद्द कर सकती है और ये पूरा मामला एक तरह से सीएम की सहमति के बिना नहीं हो सकता है।

 

विज ने जिस धारा 108 का जिक्र किया, उसमें क्या….

विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 राज्य सरकार को राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) को नीतिगत मामलों पर लिखित निर्देश जारी करने की शक्ति देती है।

धारा 108 के मुख्य बिंदु: नीतिगत निर्देश देने की शक्ति: धारा 108(1) के अनुसार, राज्य आयोग (जैसे हरियाणा विद्युत नियामक आयोग – HERC) अपने कार्यों का निर्वहन करते समय जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों पर राज्य सरकार द्वारा लिखित रूप में दिए गए निर्देशों से निर्देशित होगा। • नीति पर अंतिम निर्णय: धारा 108(2) के अनुसार, यदि यह कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई निर्देश जनहित से जुड़े नीतिगत मामले से संबंधित है, तो उस पर राज्य सरकार का निर्णय अंतिम होगा।

कल संपत सिंह ने उठाया था धारा 108 का मुद्दा

पूर्व वित्त मंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने कहा था कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तत्काल विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल करते हुए एचईआरसी के फैसले को रद करें। समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का यह निर्णय राज्य के बिजली निगमों के कर्मचारियों, अभियंताओं और अन्य हितधारकों के लिए गंभीर परिचालन एवं वित्तीय संकट पैदा करेगा तथा सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के अस्तित्व पर ही खतरा खड़ा कर देगा। किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ डाल दिया जाएगा।

 

हड़ताल के दौरान क्यों बेबस नजर आई सरकार

पटवारी-ग्राम सचिव का फॉर्मूला फेल: बिजली सप्लाई बहाल रखने के लिए हरियाणा सरकार ने फील्ड में पटवारियों और ग्राम सचिवों की ड्यूटी लगाई थी, लेकिन तकनीकी जानकारी न होने के कारण यह प्रशासनिक प्रयोग नाकाम साबित हुआ।

उपद्रव पर रोक, लेकिन फॉल्ट ठीक करने में बेबस: सब-स्टेशनों और फीडरों पर पुलिस का कड़ा पहरा लगाया गया है। पुलिस बल जानबूझकर की जाने वाली तोड़फोड़ और शरारत की घटनाओं को रोकने में तो सफल रहा, लेकिन नियमित रूप से आ रहे तकनीकी फॉल्ट और लाइनों के ब्रेकडाउन को ठीक करने का समाधान बिजली निगम नहीं निकाल पाया।

ITI स्टूडेंट्स को ड्यूटी पर लगाने का प्रयोग: अंबाला और अन्य स्थानों पर ITI स्टूडेंट्स को ड्यूटी पर लगाने से जुड़े कई पत्र हड़ताल के पहले दिन सामने आए। हालांकि, प्रैक्टिकल अनुभव की कमी के कारण ITI स्टूडेंट्स भी फॉल्ट ढूंढने में नाकाम रहे।

यूपी और पड़ोसी राज्यों से कर्मचारी बुलाने की उम्मीद टूटी: हड़ताल से निपटने के लिए हरियाणा सरकार पड़ोसी राज्यों से तकनीकी स्टाफ और कर्मचारी बुलाने की योजना बना रही थी, लेकिन अब यह उम्मीद भी टूट गई है। उत्तर प्रदेश (यूपी) के बिजली कर्मचारी संगठनों ने अपनी सरकार को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि उनका कोई भी कर्मचारी हड़ताल के दौरान ड्यूटी करने हरियाणा नहीं जाएगा।