September 19, 2026
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  •  सीजन में 22% कम बरसात, 25 सालों में 9वीं बार ऐसा हुआ

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में मानसून की गतिविधियों पर ब्रेक लगने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार आज से पश्चिमी राजस्थान के रास्ते दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के लिए स्थितियां अनुकूल बन गई हैं। इसके असर से 20 सितंबर से हरियाणा में मौसम मुख्य रूप से शुष्क हो जाएगा।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में हरियाणा में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। जून से अब तक प्रदेश में मात्र 317 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जो कि सामान्य औसत (408 मिमी) से 22% कम है। प्रदेश में पिछले 25 वर्षों में यह 9वीं बार है जब मानसून सीजन में 300 मिमी के आसपास या उससे कम बारिश दर्ज की गई है।

उधर, मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अब मानसूनी ट्रफ रेखा कमजोर पड़ रही है, जिससे राज्य में नमी का असर छंटने लगा है। इस नमी के कारण हिसार सहित राजस्थान से सटे इलाकों में हल्की धुंध देखने को मिली। वहीं दो दिन पहले हुई बारिश थमने और धूप खिलने के कारण औसतन अधिकतम तापमान में 0.8°C की बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य में सबसे ज्यादा तापमान फरीदाबाद और नूंह में 35.2°C दर्ज किया गया।

कम बारिश के कारण रेड जोन में हरियाणा

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में हरियाणा में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। जून से अब तक प्रदेश में मात्र 317 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जो कि सामान्य औसत (408 मिमी) से 22% कम है।

प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य, 9 जिलों में कम और सिर्फ 1 जिले में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। सितंबर महीने में भी पंचकूला और पलवल को छोड़कर शेष राज्य में कम बारिश हुई है। सितंबर में अब तक कुल 34.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य (58.3 मिमी) से 42 फीसदी कम है।

2014 में हुई थी सबसे कम 200 मिमी बारिश

प्रदेश में पिछले 25 वर्षों में यह 9वीं बार है जब मानसून सीजन में 300 मिमी के आसपास या उससे कम बारिश दर्ज की गई है।

वर्ष 2014 में सबसे कम 200 मिमी (सामान्य से 57% कम) बारिश हुई थी। 2002 (320.5 मिमी), 2006 (290.6 मिमी), 2007 (314.5 मिमी), 2009 (290.7 मिमी), 2012 (277.8 मिमी), 2014 (200.1 मिमी), 2015 (287.7 मिमी), 2019 (255 मिमी) और 2026 (317 मिमी)।

अगले 3 दिन सिंचाई और स्प्रे टालें किसान

आईएमडी ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि नमी के कारण अगले 2-3 दिनों तक फसलों में सिंचाई न करें और न ही किसी रसायन का छिड़काव करें। हवा में 50% से 90% नमी होने के कारण कपास में सफेद मक्खी/गुलाबी सुंडी और धान में तना छेदक कीट का खतरा बढ़ सकता है।

मौसम साफ होने पर ही अनुशंसित दवाओं का स्प्रे करें। सब्जियों की तुड़ाई साफ मौसम में करें। पशुओं को हवादार शेड में रखें और उन्हें 50-100 ग्राम मिनरल मिक्सचर दें।