September 7, 2026
7sep 3
  • दिल्ली में राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, वर्चुअल लैब बनाकर स्टूडेंट्स तक पहुंचाया मैथ का हल

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  रोहतक के गांव सांघी स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के टीजीटी शिक्षक अनिल कौशिक को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया। अनिल कौशिक को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया।

मैथ के शिक्षक अनिल कौशिक ने बताया कि स्टूडेंट्स के लिए 2017 में गणित की वर्चुअल लैब बनाई थी। क्योंकि हर समय ऑफलाइन लैब बच्चों को उपलब्ध नहीं हो सकती। ऐसे में सोचा कि बच्चों तक गणित के कठिन प्रश्नों का हल कैसे पहुंचाया जाए। इसके लिए वर्चुअल लैब बनाई, ताकि स्टूडेंट्स तक उनकी समस्या का हल पहुंच सके।

वर्चुअल लैब में 400 के करीब ई-कंटेंट

अनिल कौशिक ने बताया कि वर्चुअल लैब में 400 के करीब ई-कंटेंट तैयार किए गए है। यू-ट्यूब के साथ ही गूगल के माध्यम से लिंक तैयार करके वचुर्अल लैब बनाई है, ताकि हर बच्चे तक गणित के प्रश्नों का हल पहुंच सके। इसका लाभ बच्चों ने उठाया और गणित विषय को भी अब आसानी से पढ़ रहे है।

एक हजार शिक्षकों को दे चुके ट्रेनिंग

अनिल कौशिक ने बताया कि अब तक एक हजार के करीब शिक्षकों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। ट्रेनिंग के दौरान बिना किसी शुल्क के लिंक व क्यूआर कोड भी उपलब्ध करवाया है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को उसका लाभ मिल सके।

बच्चों को पढ़ाते हुए आया वर्चुअल लैब बनाने का आईडिया

अनिल कौशिक ने बताया कि बच्चों के माध्यम से ही सीखते हैं, उसी से यह आईडिया आया। बच्चों को सिखाने के लिए एक्टिविटी बेस्ट लर्निंग व माडलिंग का माध्यम चुना। सेल्फ लर्निंग के लिए बच्चों को प्रेरित किया। हालांकि गणित विषय चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सीखना मुश्किल नहीं है।

एनसीईआरटी से चल रही बातचीत

अनिल कौशिक ने बताया कि वर्चुअल लैब का कांसेप्ट पहले स्कूल में लागू किया। इसके बाद जिले व राज्य में इसे लागू किया। अब नेशनल स्तर पर इसे लागू करने के लिए एनसीईआरटी से बातचीत चल रही है, ताकि पूरे देश के बच्चे इसका लाभ उठा सके। वर्चुअल लैब में कक्षा छठी से 10वीं तक के प्रश्नों का हल है।

फोन की आदत को सही दिशा में करें डायवर्ट

अनिल कौशिक ने कहा कि आज की पीढ़ी फोन की एडिक्शन की तरफ जा रही है, जो बड़ा नुकसान है। अभिभावक व शिक्षक मिलकर इस फोन के एडिक्शन को पढ़ाई की तरफ डायवर्ट कर पाए तो उसका लाभ बच्चों को होगा। टैक्नोलॉजी से भाग नहीं सकते, इसके साथ ही चलना पड़ेगा।