- ठेकेदार-SDO पर कार्रवाई की मांग, बोले- दूषित पानी से 65 लोग बीमार हो चुके
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र के गांव देसूजोधा में दूषित पेयजल से पीलिया और लीवर संक्रमण फैलने के बावजूद रोकथाम एवं पर्याप्त इलाज न मिलने पर शुक्रवार को ग्रामीणों ने जलघर के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू किया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के 15 से 16 बच्चे व युवा पंजाब के बठिंडा अस्पताल में दाखिल हैं और एक युवती की हालत गंभीर बनी हुई है। इनका जिम्मेदार कौन होगा, क्योंकि प्रशासन कोई समाधान नहीं कर रहा।
धरनारत ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम चेकअप के बाद केवल टेबलेट देकर चली जाती है। यहां उनके पास पर्याप्त इलाज नहीं है। डबवाली से मरीजों को बठिंडा रेफर कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि पब्लिक हेल्थ की टीम ने आप टयूबवैल का पानी पी रहे हो, जिस कारण बीमार हो रहे हो। अब पाइप की सभी लीकेज ठीक कर दी हैं। सप्लाई में पानी ठीक आ जाएगा। यह कहकर दोनों विभागों ने पल्ला झाड़ लिया।
एसडीओ पर कार्रवाई करने की मांग
ग्रामीण बोले कि अब एक-दो दिन से टयूबवैल का पानी पीना शुरू किया है, क्योंकि सप्लाई में आज भी गंदा पानी आ रहा है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि ठेकेदार और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पीड़ित बच्चों का उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना जारी रहेगा।
ठेकेदार ने पाइपलाइन में बरती लापरवाही
गुरप्रेम देसूजोधा ने बताया कि गांव में ठेकेदार द्वारा पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया गया था। आरोप है कि ठेकेदार और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की लापरवाही के कारण नालियों का गंदा पानी जलघर की डिग्गियों में मिल गया, जिससे पीने का पानी दूषित हुआ।
कई जगहों पर पाइप-टोंटियां लीक हो रहीं
ग्रामीणों के अनुसार, गांव की नालियां कचरे से भरी पड़ी हैं और पीने के पानी की पाइपलाइन भी दूषित हो चुकी है। कई स्थानों पर पाइप और टोंटियां लीक कर रही हैं। नलों से अक्सर गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिल रही हैं। ग्रामीणों ने दूषित पेयजल और खराब सफाई व्यवस्था को बीमारी का मुख्य कारण बताया है।
आरोप- समस्या का स्थायी समाधान हो किया
ग्रामीणों के अनुसार, निजी लैब की जांच रिपोर्टों में कई मरीजों के बिलीरुबिन, एसजीओटी और एसजीपीटी का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक पाया गया है, जो पीलिया और लीवर संक्रमण की पुष्टि करता है। गांव के कई बच्चों और युवाओं का उपचार एम्स बठिंडा, डीएमसी लुधियाना, सिरसा और रामा मंडी जैसे अस्पतालों में चल रहा है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है, जिसके कारण गांव में संक्रमण के और फैलने का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों की ठेकेदार व एसडीओ पर कार्रवाई की मांग
इसी के चलते ग्रामीण शुक्रवार को जलघर के आगे धरने पर बैठ गए। उन्होंने ठेकेदार व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एसडीओ पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। ग्रामीण ने मांग उठाई है कि जो बच्चे अलग-अलग अस्पतालों में उपचार दिन हैं, वे गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं, उनका इलाज निजी अस्पताल में करवाया जाए।
धरनारत ग्रामीणों व पीड़ित परिवारों ने कहा कि जब तक उनकी समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो जाता, तब तक यह धरना जारी रहेंगे।
60-65 लोग बीमार होने का दावा
ग्रामीणों को दावा है कि अब तक देसूजोधा गांव में करीब दो सप्ताह में 60 से 65 बच्चे, युवा और महिलाएं पीलिया और लीवर संक्रमण बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें किसी का इलाज डबवाली तो किसी पंजाब के बठिंडा के अस्पताल में चल रहा है। एक युवती की हालत नाजुक बताई जा रही है।