- जैस्मिन-प्रिया, प्रीति-साक्षी और सचिन, अंकुश व नरेंद्र का फाइनल मुकाबला आज
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरियाणा के 7 बॉक्सर गोल्ड मेडल के लिए फाइनल बाउट खेलेंगे। जिसमें जैस्मिन लंबोरिया, प्रिया घनघस, प्रीति पंवार, साक्षी चौधरी, सचिन सिवाच, अंकुश पंघाल व नरेंद्र बेरवाल शामिल है। सभी बॉक्सर अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले में जीतकर फाइनल में पहुंच चुके हैं। जिनसे देश को गोल्ड मेडल की उम्मीद है।
भिवानी के गांव मित्ताथल निवासी सचिन सिवाच ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में बॉक्सिंग करते हुए सेमीफाइनल मुकाबले में ओविन हैरिश को 5-0 से मात दी और सिल्वर मेडल पक्का कर लिया। वहीं अब वे फाइनल बाउट गोल्ड मेडल के लिए खेलेंगे। सचिन इससे पहले वर्ल्ड कप फाइनल 2025 में गोल्ड मेडल, एशियन चैंपियनशिप 2025 में सिल्वर मेडल व वर्ल्ड कप 2025 में ब्रांज मेडल जीत चुके हैं।
इंग्लैंड की लक्की किंग्स बॉक्सर को 5-0 से हराया
भिवानी के गांव धनाना की बेटी प्रिया घनघस ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में इंग्लैंड की लक्की किंग्स बॉक्सर को 5-0 से हराया और फाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही प्रिया घनघस ने सिल्वर मेडल पक्का कर लिया और वे फाइनल मुकाबला गोल्ड मेडल के लिए खेलेंगे।
प्रिया घनघस ने 2016 में बॉक्सिंग शुरू की थी। पहले दादरी प्रेक्टिस करती थी, 2022 में यहां प्रैक्टिस करने लगी। उसे कुश्ती खेल बहुत पसंद था, लेकिन भिवानी में कुश्ती की एकेडमी नहीं थी। प्रिया की 10वीं कोरोना काल में हुई, 12वीं में उन्हें 83 प्रतिशत अंक आए थे।
कनाडा की बॉक्सर अमबेर को 5-0 से दी मात
भिवानी के गांव धनाना की बेटी साक्षी ने 51 किलोग्राम भारवर्ग में कनाडा की बॉक्सर अमबेर जाने वाल को 5-0 से हराया। इस जीत के साथ साक्षी फाइनल में प्रवेश कर गई और सिल्वर मेडल भी पक्का हो गया। इसके अलावा वे फाइनल मुकाबला गोल्ड मेडल जीतने के लिए खेलेंगी।
साक्षी के पिता मनोज कुमार ने बताया कि वे खेतीबाड़ी करते हैं और साक्षी की मां शीला देवी गृहणी है। उनको 2 बच्चे (एक बेटा व एक बेटी) हैं। उनका लड़का आर्मी में लगे हुए हैं। साक्षी ने 2012 में बॉक्सिंग खेलना शुरू किया था। वहीं साक्षी एमए की पढ़ाई पूरी करके एमबीए की पढ़ाई कर रही है।
दूसरे राउंड में ही आरएससी से प्रतिद्वंद्वी को हराया
भिवानी की बेटी बॉक्सर जैस्मिन लंबोरिया 57 किलोग्राम भारवर्ग में खेल रही है। उनका मुकाबला मसेलेला के साथ सेमीफाइनल हुआ। जैस्मिन ने दूसरे राउंड में ही आरएससी से प्रतिद्वंद्वी को हराया और फाइनल में जगह बनाई। जैस्मिन इससे पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में गोल्ड, वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में 2 बार गोल्ड मेडल, कॉमनवेल्थ गेम 2022 में ब्रोज व एशियन चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता है।
बॉक्सर जैस्मिन लंबोरिया के पिता जयवीर लंबोरिया होमगार्ड हैं और उनकी माता जोगिंद्र कौर गृहणी हैं। जयवीर लंबोरिया के 4 बच्चे हैं, तीन बड़ी बेटी और एक छोटा बेटा। जैस्मिन लंबोरिया तीसरे नंबर की है। जैस्मिन घर की पहली लड़की है, जो बॉक्सिंग कर रही हैं। वहीं जैस्मिन फिलहाल फिजिकल एजुकेशन में पीजी डिप्लोमा भी कर रही हैं।
2021 में जैस्मिन ने खेल कोटे से आर्मी को जॉइन की थी। जबकि 2016 में बॉक्सिंग खेलना शुरू किया था।
कैथेरिने मवापे को दी मात, फाइनल में पहुंची
भिवानी के गांव बड़सरा की बेटी प्रीति पंवार ने 54 किलोग्राम भारवर्ग में भाग लिया। उन्होंने कैथेरिने मवापे को मात देते हुए फाइनल में जगह बनाई। साथ ही सिल्वर मेडल पक्का कर लिया और गोल्ड मेडल के लिए फाइनल मुकाबला खेलेंगी। प्रीति पंवार ने विश्व कप 2025 में स्वर्ण पदक, एशियाई खेल 2022 में कांस्य पदक, एशियाई अंडर-22 चैंपियनशिप 2024 में स्वर्ण पदक जीता है।
प्रीति पंवार के पिता सोमबीर ने बताया कि वे हरियाणा पुलिस में बतौर एएसआई (सहायक उप निरीक्षण) के पद पर तैनात हैं। उनके तीन बच्चे (2 बेटी व एक बेटा) हैं। प्रीति तीनों में से बीच की है। वह बीए फाइनल ईयर में पढ़ाई भी कर रही है। प्रीति ने वर्ष 2017 में बॉक्सिंग की शुरूआत की थी। उसके चाचा एवं कोच विनोद कुमार को देखकर बॉक्सिंग शुरू की। प्रीति ने कोच के पास ही बॉक्सिंग का अभ्यास किया है।
हिसार के बॉक्सर अंकुश पंघाल हिसार जिले के गांव भेरिया के 22 वर्षीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 80 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। बॉक्सर अंकुश ने वर्ष 2017 में महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। छह भाई-बहनों के परिवार में पले-बढ़े अंकुश का खेलों की ओर रुझान अपनी बहन और भाई को देखकर बढ़ा। कोच प्रवीण सावंत की सलाह पर पिता सुरेश पंघाल ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए रोज गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर प्रशिक्षण केंद्र तक ले जाना और वापस लाना अपनी दिनचर्या बना लिया। अंकुश के करियर में सबसे कठिन दौर 2018 में आया, जब वे अपनी पहली स्टेट चैंपियनशिप के फाइनल में हार गए। इस हार से निराश होकर उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ने का फैसला तक कर लिया था। तब पिता सुरेश और कोच प्रवीण सावंत ने उन्हें समझाया कि एक हार से सफर खत्म नहीं होता। अंकुश प्रतिदिन सुबह दो घंटे और शाम तीन घंटे अभ्यास करते हैं। उनकी ट्रेनिंग में फिटनेस, पंचिंग स्पीड, फुटवर्क और काउंटर अटैक पर विशेष फोकस किया जाता है।
यह रहेगा बॉक्सिंग का शेड्यूल महिला वर्ग के मुकाबले 54 किलोग्राम भारवर्ग में प्रीति का मुकाबला : साढ़े 3 बजे 57 किलोग्राम भारवर्ग में जैस्मिन लंबोरिया का मुकाबला : 3 बजकर 45 मिनट पर 51 किलोग्राम भारवर्ग में साक्षी चौधरी का मुकाबला : 9 बजे 60 किलोग्राम भारवर्ग में प्रिया का मुकाबला : सवा 9 बजे
पुरुष वर्ग के मुकाबले 60 किलोग्राम भारवर्ग में सचिन सिवाच का मुकाबला : 10 बजकर 45 मिनट पर 80 किलोग्राम भारवर्ग में अंकुश का मुकाबला : 11 बजकर 15 मिनट पर 90 से ज्यादा किलोग्राम भारवर्ग में नरेंद्र का मुकाबला : 11 बजकर 45 मिनट पर