May 13, 2026
13 may 15
  • एक्सपर्ट्स बोले- विधानसभा चुनाव में जहां हारी, अब वहीं जीत; कांग्रेस को अपने गढ़ में ही डेंट

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा निकाय चुनावों में भाजपा ने कई निकायों में जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखा। कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत पाई, बस उसे खुद के समर्थन से चेयपर्सन बनीं रीमा सोनी से ही संतोष करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा की इस सफलता के पीछे बूथ स्तर पर मजबूत संगठन, कार्यकर्ताओं का नेटवर्क और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का असर रहा।

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि कांग्रेस महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को भुनाने में नाकाम रही, जिससे उसे संगठनात्मक कमजोरी और स्थानीय रणनीति के अभाव का खामियाजा भुगतना पड़ा। कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले सांपला में भी इसका नुकसान उठाना पड़ा। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा विधायक हैं।

कांग्रेस को अब अपनी टीम को फिर से मजबूत करने, गुटबाजी कम करने और स्थानीय नेताओं को ज्यादा फैसले लेने की आजादी देने की जरूरत है। भाजपा ने अब उन जगहों पर भी कांग्रेस को हराया, जहां विधानसभा चुनाव में भाजपा हारी थी। यह भाजपा के लिए कमबैक जैसा है।

अब जानिए पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने नतीजों को कैसे समझा….

भाजपा को बूथ लेवल टीम ने जिताया

पॉलिटिकल एक्सपर्ट और सीनियर जर्नलिस्ट सतीश त्यागी ने कहा- “भाजपा की बूथ लेवल पर मजबूत टीम और कार्यकर्ताओं ने चुनाव जीतने में बड़ी मदद की। सरकार की योजनाओं का भी इस चुनाव पर असर दिखा। राज्य और केंद्र सरकार की गरीबों, महिलाओं और योजनाओं से फायदा पाने वालों के बीच अच्छी पकड़ बनी रही। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद चुनाव पर ध्यान रखा।

उम्मीदवारों को चुनते समय जाति और इलाके का भी ध्यान रखा गया। सीधे फायदे वाली योजनाओं से जुड़े लोगों ने भाजपा पर भरोसा जताया। निकाय चुनाव सीधे विधानसभा या लोकसभा चुनाव का पूर्वानुमान नहीं होते, लेकिन वे राजनीतिक रुझान अवश्य बताते हैं। इन परिणामों से संकेत मिलते हैं कि बीजेपी शहरी वोट बैंक में मजबूत बनी हुई है।”

कांग्रेस ने महंगाई-बेरोजगारी नहीं भून पाई

सतीश त्यागी ने कांग्रेस उम्मीदवारों की हार पर कहा- “कांग्रेस के भीतर विभिन्न नेताओं के बीच तालमेल की कमी कई क्षेत्रों में दिखाई दी। शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन भाजपा जितना सक्रिय नहीं दिखा। पार्टी कई जगह स्थानीय नेतृत्व के बजाय कुछ प्रमुख चेहरों पर निर्भर रही। महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे होने के बावजूद कांग्रेस उन्हें स्थानीय चुनावी एजेंडे में निर्णायक रूप से नहीं बदल सकी।

कांग्रेस को अपनी टीम को फिर से मजबूत करने की जरूरत है। हुड्डा के इलाकों में भी अब मुकाबला कड़ा हो रहा है। इन चुनावों से पता चला है कि जो लोग सरकारी योजनाओं से फायदा पा रहे हैं और जिनकी टीम मजबूत है, वही जीत रहे हैं। अगर कांग्रेस को आगे अच्छा करना है, तो उसे आपस में झगड़ा कम करना होगा, शहरों में अपनी टीम को मजबूत करना होगा और अपने लोकल नेताओं को ज्यादा फैसले लेने की आजादी देनी होगी।

तीनों निगमों में भाजपा का कमबैक

पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. भारत ने कहा- “2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान सोनीपत, अंबाला सिटी और पंचकूला जैसे शहरी क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था। कई बूथों पर पार्टी पीछे रही और कांग्रेस ने शहरी मतदाताओं में अपनी पकड़ दिखाई।

अब मेयर चुनाव में भाजपा की जीत ने यह संदेश दिया कि पार्टी ने अपने संगठन, स्थानीय रणनीति और मतदाता संपर्क को फिर से प्रभावी बनाया है। यह भाजपा के लिए इन क्षेत्रों में कमबैक जैसा है। साथ ही पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का भी फर्क पड़ा है। इसका असर हरियाणा में दो स्तरों पर देखा गया है, पहला- कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास बढ़ा, दूसरा- मतदाताओं में जीतने वाली पार्टी की धारणा मजबूत हुई।”

कांग्रेस अपने गढ़ सांपला में कमजोर पड़ी

डॉ. भारत ने आगे कहा- “सांपला का परिणाम प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह क्षेत्र लंबे समय से भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा और उनके समर्थकों के प्रभाव वाला माना जाता रहा है। यहां बीजेपी की जीत को विश्लेषक सिर्फ स्थानीय सफलता नहीं, बल्कि कांग्रेस के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्रों में कमजोर पड़ती पकड़ के रूप में देख रहे हैं।

इसका राजनीतिक संदेश, कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। उकलाना में निर्दलीय उम्मीदवार रीमा सोनी को कांग्रेस और इनेलो का साथ मिला। दूसरा वह युवा चेहरा थीं। इसलिए यहां वह सीट निकालने में कामयाब रही।”