May 13, 2026
13 may 3
  • अगले हफ्ते से लू चलने की संभावना

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में बुधवार सुबह अधिकतर जिलों में मौसम खराब रहा। जींद, हिसार, पानीपत, करनाल, कैथल और फतेहाबाद में बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़ ने आज प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में आंधी और बिजली चमकने की चेतावनी जारी की है।

महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नूंह, पलवल, यमुनानगर और पंचकूला जैसे जिलों में आज गरज-चमक के साथ 50-60 किमी प्रति घंटे और कहीं-कहीं 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

15 मई से मौसम फिर से शुष्क होने लगेगा, जिसके बाद अगले 7 दिनों में अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस वजह से हरियाणा में एक बार फिर लू चलने की संभावना बन रही है।

6 जिलों में पारा 40 के पार

मंगलवार को सिरसा प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा, हिसार में 42.4 डिग्री सेल्सियस, महेंद्रगढ़ में 42.2 डिग्री सेल्सियस, रोहतक में 41.1 डिग्री सेल्सियस, चरखी दादरी में 41.7 डिग्री सेल्सियस और भिवानी में 40.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे इन शहरों में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया।

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री सेल्सियस कम है, लेकिन आने वाले दिनों में लू चलने की प्रबल संभावना है।

रात का बढ़ रहा तापमान

हरियाणा में रातें भी अब धीरे-धीरे गर्म होने लगी हैं। पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में 0.3°C की वृद्धि देखी गई है। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान गुरुग्राम में 21.0°C रिकॉर्ड किया गया। अंबाला में 26.5°C और सिरसा में 27.8°C न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ, जो सामान्य से थोड़ा अधिक है। चंडीगढ़ और करनाल जैसे क्षेत्रों में रात का तापमान 22 से 25°C के बीच बना हुआ है, जिससे सुबह-शाम मामूली राहत बनी हुई है।

किसानों के लिए विशेष सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को बदलते मौसम को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। अगले 3 दिनों तक बारिश और तेज हवाओं की संभावना के कारण कपास की बुवाई को फिलहाल टालने का सुझाव दिया गया है। जिन किसानों की गेहूं या जौ की फसल पक चुकी है, वे जल्द से जल्द कटाई और थ्रेसिंग कर लें। तेज हवाओं के चलते गेहूं के भूसे को सुरक्षित स्थान पर ढक कर रखें, ताकि वह उड़े नहीं। सब्जियों और अन्य फसलों में सिंचाई फिलहाल रोक दें। पशुपालक अपने पशुओं को शेड के नीचे रखें और मच्छरों से बचाव के लिए उचित प्रबंधन करें।