January 25, 2026
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  • जूनियर रेजिडेंट, ट्यूटर और डेमोंस्ट्रेटर पदों पर होंगे समायोजित, एमबीबीएस से मांगा विकल्प

हरियाणा के नागरिक अस्पतालों में चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों को आगामी फरवरी महीने में 600 नए डॉक्टर मिलने जा रहे हैं। साल 2020-21 बैच के एमबीबीएस ग्रेजुएट्स का पहला दस्ता अपनी अनिवार्य बॉन्ड सेवा शुरू करने के लिए तैयार है। स्वास्थ्य विभाग ने इन युवा डॉक्टरों की तैनाती के लिए माइक्रो-प्लानिंग शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य विभाग ने भी इन एमबीबीएस ग्रेजुएट छात्रों को जूनियर रेजिडेंट, ट्यूटर, डेमोंस्ट्रेटर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। छात्रों से विकल्प मांगा गया है कि क्या वह सरकारी सेवाओं को चुनेंगे या सेवा प्रोत्साहन बॉन्ड एकमुश्त या मासिक किस्तों में जमा करेंगे।

चूंकि ये ग्रेजुएट छात्र फरवरी 2026 तक बॉन्ड सेवा के लिए उपलब्ध होने की संभावना है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों , जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान करने का कार्य सौंपा गया है जहां इन बॉन्ड डॉक्टरों को तैनात किया जा सकता है।

मेडिकल कॉलेजों से जानकारी मांगी

स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों और कुटैल, करनाल स्थित विश्वविद्यालय स्वास्थ्य विज्ञान के कुलपति से यह जानकारी देने का अनुरोध किया जाता है कि बॉन्ड अवधि पूरी करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में कितने छात्रों को समायोजित किया जा सकता है और क्या इन एमबीबीएस स्नातकों को जूनियर रेजिडेंट, ट्यूटर या डेमोंस्ट्रेटर आदि पदों पर समायोजित किया जा सकता है।इसके अलावा, सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को इन एमबीबीएस स्नातकों के लिए तैनाती स्थानों की पहचान करने के लिए कहा गया है।

छात्रों को दो विकल्पों को चुनना होगा

हाल ही में जारी निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों को नीति के अनुसार छात्रों से विकल्प लेने के लिए कहा गया है। छात्रों को या तो सरकारी सेवा चुननी होगी, या फिर सेवा प्रोत्साहन बॉन्ड एकमुश्त या मासिक किस्तों में जमा करना होगा।इन एमबीबीएस स्नातकों को जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर, स्टेट सर्विस बॉन्ड डॉक्टर या सर्विस-ऑब्लिगेटेड मेडिकल ग्रेजुएट आदि के रूप में नामित किया जा सकता है।

7500 रुपए तक होगी सैलरी

चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग द्वारा विकसित की जाने वाली व्यवस्था के अनुसार योग्यता और पसंद के आधार पर पदों का आवंटन किया जाएगा।इन डॉक्टरों को दिया जाने वाला वेतन एनएचएम द्वारा नियोजित संविदात्मक एमबीबीएस डॉक्टरों को दिए जा रहे वेतन के बराबर होगा, जो कि 75,000 रुपए के साथ 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि होगी।