- पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़ के लोगों को मिलेंगे कंसेशनल पास, राज्य में पंजीकृत बॉर्डर एरिया की टैक्सी को छूट
हरियाणा : ब्रेकिंग न्यूज : हिमाचल प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया था। मगर पड़ोसी राज्यों में विरोध के चलते सरकार को अपने फैसले से यू-टर्न लेना पड़ा। अब टैक्स दरों को घटाकर संतुलित किया गया है। एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने 12 सीटर तक के सभी पैसेंजर व्हीकल के लिए एंट्री टैक्स 130 व 170 से घटाकर 100 रुपए कर दिया गया है।
सुक्खू सरकार ने बड़ी राहत टोल बैरियर के पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निवासियों को दी है। सरकार ने फैसला लिया कि हिमाचल के बॉर्डर एरिया के आसपास रहने वाले पड़ोसी राज्यों के लोगों को ‘कंसेशनल पास’ की सुविधा दी जाएगी। हिमाचल की सीमाएं जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तराखंड से लगती हैं। बॉर्डर एरिया के साथ लगते इन पड़ोसी राज्यों के वासियों को भी राज्य सरकार कंसेशनल पास देगी। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
पहले, 70 से बढ़ाकर 170 रुपए की थी एंट्री फीस
राज्य सरकार ने एक महीना पहले जीप, कार, लाइट मोटर व्हीकल की एंट्री फीस 70 रुपए से बढ़ाकर 170 रुपए और छह से 12-सीटर वाहनों की एंट्री फीस 110 रुपए से बढ़ाकर 130 रुपए कर दी थी। पंजाब और हरियाणा में जबरदस्त विरोध के बाद सरकार ने अब जीप, कार, लाइट मोटर व्हीकल और 12 सीटर तक के वाहनों की फीस 100 रुपए कर दी है। इनसे बड़े वाहनों की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया।
राज्य सरकार ने हिमाचल में पंजीकृत उन कमर्शियल टैक्सी को भी एंट्री टैक्स में छूट दे दी है, जो बॉर्डर एरिया के आसपास रहते है।
पहले क्या नियम था?
पहले, हिमाचल के बॉर्डर एरिया के आसपास रहने वाले पड़ोसी राज्यों के सभी प्राइवेट और कमर्शियल व्हीकल को एंट्री टैक्स देना अनिवार्य होता था। मगर अब राज्य सरकार बॉर्डर एरिया के आसपास रहने वाले पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी कंसेशनल पास देगी। राज्य का एक्साइज डिपार्टमेंट जल्द कंसेशनल पास की दरें निर्धारित करेगा।
सरकार ने फैसला वापस क्यों लिया?
राज्य सरकार ने केंद्र से मिलने वाली लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के बाद एंट्री टैक्स दरों में इजाफा किया था। इसमें 80 से 230 रुपए तक इजाफा किया गया। इसके बाद पंजाब और हरियाणा में लोग हिमाचल के एंट्री टैक्स के खिलाफ सड़कों पर उतरने शुरू हुए। 31 मार्च की रात से हिमाचल के एंट्री पॉइंट बंद करने की चेतावनी दी गई। पंजाब सरकार ने भी हिमाचल के वाहनों पर जवाबी टैक्स लगाने के संकेत दिए थे। इस वजह से राज्य सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
विरोध क्यों हो रहा था?
हिमाचल की सीमाएं पांच पड़ोसी राज्यों से लगती हैं। इस वजह से हिमाचल के बॉर्डर एरिया के लोगों का पड़ोसी राज्यों में कारोबार, रिश्तेदारी, उठना-बैठना और नौकरी बहुत ज्यादा है। इससे लोगों का बार-बार दूसरे प्रदेशों में आना-जाना लगा रहता है।
इस वजह से बॉर्डर एरिया के लोगों की आवाजाही महंगा सौदा साबित हो रही थी। जितना खर्च गाड़ी में पेट्रोल-डीजल का नहीं आता, उससे ज्यादा खर्च एंट्री टैक्स भरने में लगना था। व्यापारियों को माल की ढुलाई महंगी होने का डर सता रहा था। पर्यटन कारोबारी भी चिंतित थे। इस वजह से एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी का विरोध हो रहा था।
अब क्या हुआ?
राज्य सरकार ने अब 12 सीटर तक के वाहनों पर एंट्री टैक्स 100 रुपए कर दिया है। इसके बाद पड़ोसी राज्यों में विरोध के स्वर शांत हो गए। इससे न केवल पड़ोसी राज्यों के वाहन चालक, बल्कि हिमाचल आने वाले पर्यटक तथा पर्यटन कारोबारी भी खुश हैं। बढ़े हुए टोल का हिमाचल की टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ने की संभावना थी।
हिमाचल को एंट्री टैक्स से कितनी कमाई होगी
एंट्री टैक्स से राज्य सरकार ने अनुमानित 228 करोड़ रुपए की कमाई का लक्ष्य रखा है। इस राशि को नई सड़कें बनाने, टूटी सड़कों की मरम्मत, सड़कों के चौड़ीकरण और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा।