- 2 साल में 70 नेशनल-स्टेट मेडल जीते; बोला- अंकित बैयांपुरिया से मिली प्रेरणा
हरियाणा : ब्रेकिंग न्यूज : सोनीपत जिले के गांव बैयांपुर के रहने वाले सुरेंद्र सिंह ने यह साबित कर दिया है कि जुनून, मेहनत और मजबूत इरादों के आगे उम्र कोई मायने नहीं रखती। करीब 2 साल पहले तक खेलों से दूर रहने वाले सुरेंद्र सिंह आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।
फिटनेस आइकन अंकित बैयांपुरिया से प्रेरित होकर उन्होंने 2024 में खेलों में कदम रखा और महज 2 साल के भीतर ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 70 से अधिक पदक जीतकर सबको हैरान कर दिया।हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया मास्टर्स नेशनल गेम्स में 4 अलग-अलग दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन किया है।
अंकित बैयांपुरिया से मिली प्रेरणा, बदली जिंदगी
सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि उनका खेलों से पहले कोई खास जुड़ाव नहीं था। वे अपनी सरकारी नौकरी और खेतीबाड़ी में ही व्यस्त रहते थे। लेकिन जब उन्होंने अपने ही गांव के अंकित बैयांपुरिया को देश के प्रधानमंत्री के साथ फिटनेस के चलते देखा, तभी उन्होंने ठान लिया कि वे भी खुद को फिट बनाएंगे और खेलों में उतरेंगे। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
नौकरी और खेती के साथ शुरू की कड़ी मेहनत
वाटर सप्लाई डिपार्टमेंट में पिछले 32 वर्षों से पंप ऑपरेटर के रूप में कार्यरत सुरेंद्र सिंह ने अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद समय निकाला। सुबह-शाम दो-दो घंटे अभ्यास शुरू किया। दिन में नौकरी और खाली समय में खेतों में काम करने के बाद भी उन्होंने अपनी ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं छोड़ी।
खेतों से शुरू हुई दौड़, नेशनल तक पहुंचा सफर
सुरेंद्र ने 2024 में अपने गांव के खेतों में दौड़ लगाकर शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और वे प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे। आज उनकी यह मेहनत उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक ले आई है, जहां वे लगातार मेडल जीत रहे हैं।
21 और 22 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया मास्टर्स नेशनल गेम्स में सुरेंद्र सिंह ने 5 किलोमीटर, 3 किलोमीटर, 1500 मीटर और 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लेते हुए चारों में गोल्ड मेडल जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।
दो साल में 70 से ज्यादा मेडल जीते
सुरेंद्र सिंह ने अब तक नेशनल स्तर पर 22 से अधिक और स्टेट स्तर पर 50 से ज्यादा मेडल जीत लिए हैं। इस तरह कुल मिलाकर उन्होंने करीब 70 से अधिक पदक हासिल किए हैं, जो उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी बयां करते हैं।
पहली जीत से मिला आत्मविश्वास
25 नवंबर 2024 को पंचकूला में आयोजित अपनी पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सुरेंद्र सिंह ने गोल्ड मेडल जीता था। यही जीत उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
साल 2025 में सूरत में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने 5 मेडल जीते। इसके बाद अलवर में भी 5 मेडल अपने नाम किए। दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में उन्होंने 4 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, जिसमें गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक शामिल थे।
बिना कोच के तैयारी
सुरेंद्र सिंह ने बिना किसी कोच के खुद ही अभ्यास कर यह मुकाम हासिल किया है। हालांकि वे अंकित बैयांपुरिया को अपना आदर्श और गुरु मानते हैं। उनका कहना है कि अंकित की फिटनेस और अनुशासन ने उन्हें बहुत प्रेरित किया।
सुरेंद्र रोज सुबह 4 बजे उठकर अभ्यास के लिए निकलते हैं। वे फल, जूस और ड्राई फ्रूट्स का सेवन करते हैं और संतुलित आहार लेते हैं। हर दिन वे अलग-अलग लक्ष्य तय कर कभी 5 तो कभी 10 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं।
उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है
सुरेंद्र सिंह का कहना है कि जब उन्होंने शुरुआत की थी तो लोग तंज कसते थे कि इस उम्र में क्या हासिल होगा। लेकिन आज 70 से ज्यादा मेडल जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
उनकी इस उपलब्धि पर गांव और परिवार में खुशी का माहौल है। घर लौटने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ। वहीं उनके विभाग द्वारा भी उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया जाता है और जल्द ही सम्मानित किए जाने की तैयारी है।