March 22, 2026
22 march 2
  • MLA हाईकमान के फैसले पर उठा रहे सवाल, 2028 में बढ़ेंगी मुश्किलें, 2 सीटें होंगी खाली

हरियाणा : ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा। क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर कार्रवाई की चर्चा के बीच अब कई विधायक खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे पार्टी में बगावत के संकेत दिखाई देने लगे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कांग्रेस नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए थे, लेकिन अब जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं, वे खुलकर पार्टी हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। इससे साफ है कि अंदरखाने असंतोष गहराता जा रहा है और पार्टी अनुशासन कमजोर पड़ता दिख रहा है।

हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे, लेकिन इस जीत ने पार्टी के भीतर की दरारों को उजागर कर दिया। खास बात यह है कि चार वोट रद्द होने और एक वोट तकनीकी कारणों से खारिज होने के बावजूद पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

अब नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरोसे और विश्वसनीयता को दोबारा स्थापित करने की है। यह इसलिए भी जरूरी है कि यदि यह बगावत बढ़ी तो राज्यसभा में 2028 में खाली हो रही हरियाणा की दो सीटों पर अपना उम्मीदवार जीतना कांग्रेस के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस को इस घमासान को जल्द शांत करना होगा।

2028 में राज्यसभा की ये दो सीटें होंगी खाली…

कार्तिकेय शर्मा का कार्यकाल 1 अगस्त 2028 को पूरा होगा

हरियाणा से राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा का कार्यकाल 1 अगस्त 2028 को पूरा होगा। उन्होंने भाजपा-समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 2 अगस्त 2022 को पदभार ग्रहण किया था। राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।

इसी तरह हरियाणा से निर्विरोध चुनी गईं भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा का कार्यकाल भी 1 अगस्त 2028 में पूरा होगा। उन्होंने 13 दिसंबर 2024 को आधिकारिक रूप से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यभार संभाला था। यह उपचुनाव कृष्ण लाल पंवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर हुआ था।

कांग्रेस में घमासान का असर, राजनीतिक विश्लेषक के 5 पॉइंट्स..

कार्रवाई हुई तो 2028 में दो सीटों का गणित बिगड़ सकता है

पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के प्रोफेसर डॉ. भारत कहते है कि अगर कांग्रेस हाईकमान क्रॉस वोटिंग करने वाले 5 विधायकों पर सख्त कार्रवाई करता है, जैसे निलंबन या निष्कासन, तो पार्टी की संख्या विधानसभा में घट सकती है। ऐसी स्थिति में 2028 के राज्यसभा चुनाव में दो सीटें जीतना कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकता है। कम संख्या के कारण पार्टी को दूसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ेगा या समझौते की राजनीति करनी पड़ सकती है।

बगावत बढ़ी तो संगठन में खुली टूट की आशंका

जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं, वे अब खुलकर बयान दे रहे हैं और कैंसिल वोट करने वालों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर यह टकराव और बढ़ा तो पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। बगावत की स्थिति में कांग्रेस को संगठनात्मक नुकसान के साथ-साथ राजनीतिक छवि का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हाईकमान के सामने ‘अनुशासन बनाम संख्या’ की दुविधा

कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अनुशासन बनाए रखने के लिए कार्रवाई करे या फिर 2028 के चुनावी गणित को देखते हुए नरम रुख अपनाए। ज्यादा सख्ती करने से संख्या घट सकती है, जबकि नरमी दिखाने से पार्टी में अनुशासन कमजोर होने का संदेश जाएगा। यही दुविधा आने वाले फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

कैंसिल वोट वालों के नाम आए तो विवाद और गहराएगा

यदि जांच में कैंसिल वोट करने वाले विधायकों के नाम भी सामने आते हैं, तो विवाद और बड़ा हो सकता है। इससे कार्रवाई का दायरा बढ़ेगा और पार्टी के भीतर असंतोष और फैल सकता है। ऐसे हालात में कांग्रेस को एक साथ कई मोर्चों पर राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

2028 में गठबंधन या बाहरी समर्थन की मजबूरी बन सकती है

अगर मौजूदा विवाद के कारण कांग्रेस की संख्या कमजोर होती है या कुछ विधायक अलग रास्ता चुनते हैं, तो 2028 के राज्यसभा चुनाव में पार्टी को दूसरी सीट जीतने के लिए गठबंधन या निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। यानी मौजूदा संकट भविष्य में राजनीतिक सौदेबाजी की मजबूरी पैदा कर सकता है।

जिन्हें नोटिस मिला वह विधायक क्या कह रहे…

जरनैल सिंह: भूपेंद्र हुड्डा का नाम यहां जिंदा रखने की वजह से ही अशोक तंवर और कुमारी सैलजा से लड़ाई लड़ी। पार्टी के सभी विधायक चोरी-चोरी CM से मिलने जाते हैं, काम कराते हैं। नायब सैनी बहुत ही बढ़िया मुख्यमंत्री हैं, काम करने वाले हैं। पहले सीएम विपक्ष के विधायकों के घर नहीं जाते थे, लेकिन नायब सैनी ने इतिहास रचते हुए ये शुरुआत की है।
कुलदीप वत्स: जब तक राहुल गांधी खुद को कांग्रेस से बड़ा मानने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं करते, यहां हालात नहीं सुधरने वाले। पार्टी में बहुत ‘जयचंद’ बैठे हैं।

शैली चौधरी: अगर इस बात में सच्चाई नहीं है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी। कांग्रेस में पसंद नापसंद का खेल चल रहा है जिसको ना पसंद किया जाता है तो उनको वह लोग निपटा देते हैं। मैं क्यों इस्तीफा दूं , मेरा फैसला नारायणगढ़ की जनता करेगी।

मोहम्मद इजराइल: मैंने ‘अंतरात्मा की आवाज़’ पर वोट दिया और इस मुद्दे पर वे ईद के बाद कार्यकर्ताओं से सलाह-मशविरा करके अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए पार्टी के कुछ नेताओं की कार्यशैली पर नाराजगी भी जाहिर की है।