- एक मिल में ₹5.81 करोड़ का गबन
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में धान घोटाले में पहली FIR दर्ज हुई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (DFSC) की जांच के बाद पुलिस ने पहली बार कार्रवाई की। जांच में इस मिल में 24,318.75 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी कीमत करीब 5 करोड़ 81 लाख रुपए आंकी गई है।
DFSC इंस्पेक्टर रिंकू कुमार ने थाना सिटी पिहोवा में शिकायत दर्ज कराई कि 2025-26 सीजन में मिल को कस्टम मिलिंग के लिए 39,373.75 क्विंटल धान आवंटित किया गया था। 25 नवंबर 2025 को चंडीगढ़ की टीम ने स्टॉक चेक किया था, तब मिल के पास पूरा स्टॉक पाया गया था।
चार महीने में घटा स्टॉक
करीब 4 महीने बाद 17 मार्च को DFSC के आदेश पर AFSO शाहाबाद राजीव सैनी और IFS गौरव अरोड़ा की टीम ने दोबारा फिजिकल वेरिफिकेशन किया, तो मिल में धान की कमी पाई गई। यह धान सीएमआर के रूप में FCI को सौंपना था। चेकिंग के बाद स्टॉक कम मिलने पर DFSC ऑफिस से कार्रवाई के ऑर्डर मिलने पर शिकायत दी गई।
राइस मिलर्स में मचा हड़कंप
जांच के बाद 24318.75 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत MSP के हिसाब से करीब 5.81 करोड़ रुपए है। स्टॉक कम पाए जाने पर डीएफएससीजिले में पहली कार्रवाई के बाद दूसरे राइस मिलर्स में हड़कंप मच गया है। मिलर्स को उनकी राइस मिल पर भी छापे पड़ने का डर सता रहा है।
फर्जी गेट पास काटे गए- वड़ैच
उधर, किसान नेता प्रिंस वड़ैच ने राइस मिलर्स के साथ-साथ कुछ अधिकारियों पर मिलभगत करने के आरोप लगाए। आरोप लगाया कि फर्जी गेट पास काटकर घोटाले को अंजाम दिया गया। गेट पास कैसे कटे, इसकी जांच होनी चाहिए। हाई लेवल जांच से मिलर्स और अधिकारियों की मिलीभगत सामने आएगी।
6 सेक्रेटरी किए थे चार्जशीट
करीब तीन महीने पहले ही जिले के 6 मार्केट कमेटी के सेक्रेटरी को चार्जशीट किया गया था। इनमें थानेसर के हरजीत सिंह, पिहोवा के बलवान सिंह, शाहाबाद के कृष्ण मलिक, पिपली के गुरमीत सिंह, इस्माइलाबाद के चंद्र सिंह और लाडवा के संत कुमार शामिल थे। इन सेक्रेटरी पर मिलर्स को गेट पास काटने के लिए अपना यूजर आईडी और पासवर्ड देने के आरोप लगे थे।
5 हजार करोड़ घोटाले के आरोप
उधर, भाकियू (चढूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने पूरे प्रदेश में 5 हजार करोड़ धान के घोटाले के आरोप लगाए थे। उन्होंने CBI से मामले की जांच की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि 2500 करोड़ के घोटाले के सबूत भाकियू सरकार तक पहुंचा चुकी है। शिकायत के बाद कुरुक्षेत्र के DFSC को हटाया गया था।