February 3, 2026
हरियाणा कांग्रेस में 180 ब्लॉक अध्यक्षों के नाम पर रार (3)
  • जिलाध्यक्ष से सांसद तक अपनों समर्थकों के लिए अड़े, 7 जिलों का गठन लटका

हरियाणा : ब्रेकिंग न्यूज

हरियाणा कांग्रेस में संगठन गठन की प्रक्रिया एक बार फिर आंतरिक खींचतान और गुटबाजी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि जिला स्तर से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी तक, नियुक्तियों पर सहमति बनाना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। गुटों में बंटे नेता अपने समर्थकों को तवज्जो दिलाने की जिद पर अड़े हैं, जिसका सीधा असर पार्टी की जमीनी सक्रियता पर पड़ रहा है।

ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति पर ‘ब्रेक’

कांग्रेस पार्टी को प्रदेश के 180 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति करनी है, लेकिन यह मामला पूरी तरह उलझ गया है। इन पदों के लिए जिलाध्यक्ष, विधायक, सांसद और पूर्व विधानसभा उम्मीदवारों के बीच आपसी सहमति नहीं बन पा रही है। हर धड़ा अपने वफादारों को ब्लॉक की कमान सौंपना चाहता है।

जिला कमेटियां अधर में, राहुल गांधी के प्रशिक्षण के बाद भी सुस्ती

संगठन की दृष्टि से हरियाणा में कांग्रेस के 33 जिले हैं। हालांकि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है और राहुल गांधी स्वयं उन्हें प्रशिक्षण दे चुके हैं, लेकिन अब भी 7 जिलों में जिला कमेटियों का गठन नहीं हो पाया है। केवल 26 जिलों में ही कमेटियां बन सकी हैं। विधायकों और जिला प्रधानों के बीच तालमेल की कमी और अलग-अलग खेमों (हुड्डा बनाम अन्य) की सक्रियता ने इस प्रक्रिया को थाम दिया है।

प्रदेश कार्यकारिणी का भी यही हाल

जिलों में हालात यह हैं कि जिला प्रधानों व विधायकों में एकजुटता नहीं है। जिला प्रधान और विधायक पूरी तरह से अपने-अपने नेताओं के खेमों में बंटे हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर राव नरेंद्र सिंह की नियुक्ति को तीन माह से अधिक समय हो गया, लेकिन अभी तक प्रदेश कमेटी का गठन सिर्फ इसलिए नहीं हो पाया, क्योंकि कमेटी में शामिल किए जाने वाले नामों पर कांग्रेस के सभी गुटों में एकराय नहीं बन पाई है। हरियाणा कांग्रेस के अग्रणी संगठन (फ्रंटियल आर्गेनाजेशन) और प्रकोष्ठ व विभागों में भी लंबे समय से नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं।

युवा कांग्रेस सिर्फ अध्यक्ष के सहारे

हरियाणा युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर निशित कटारिया की नियुक्ति को छोड़कर अधिकतर अग्रणी संगठन और प्रकोष्ठ व विभागों में नई नियुक्तियों की जरूरत महसूस की जा रही है। युवक कांग्रेस की राज्य व जिला स्तरीय गतिविधियों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी अग्रणी संगठन, विभाग और प्रकोष्ठ की पार्टी में कोई खास गतिविधि नहीं है।

महिला कांग्रेस में सुधा भारद्वाज, इंटक में अमित यादव, सेवादल में डा. पूनम चौहान और एनएसयूआई में अविनाश यादव की नियुक्तियों को लंबा समय हो गया है। इन अग्रणी संगठनों में नये अध्यक्षों को काम करने का मौका नहीं मिल पा रहा है।

कांग्रेस में 12 प्रकोष्ठ भी खाली

हरियाणा कांग्रेस में यही स्थिति प्रकोष्ठों व विभागों की है। कांग्रेस में 23 प्रकोष्ठ व विभाग हैं, लेकिन इनमें से 12 प्रकोष्ठ व विभाग ऐसे हैं, जिनके राज्य संयोजक अध्यक्ष के पद लंबे समय से खाली चल रहे है। 11 विभागों व प्रकोष्ठों में राज्य संयोजक के पद भरे हुए है, लेकिन उनकी सक्रियता नहीं के चराबर है। इन पदों पर भी काफी

समय से नई नियुक्तिया नहीं हो पाई है। ओबीसी के राज्य संयोजक पद पर रमैया सैनी की नियुक्ति है, जबकि किसान कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर धर्मवीर कोलेखां की नियुक्ति है। किसान कांग्रेस को बार्टी का प्रमुख प्रकोष्ठ माना जाता है, लेकिन इस पर लंबे समय से किसी तरह की गतिविधि नहीं हो रही है।