- एन-44 के साथ बनेगा कॉरिडोर
दिल्ली से सोनीपत, पानीपत और करनाल को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित दिल्ली–पानीपत–करनाल नमो भारत (आरआरटीएस) हाई स्पीड़ रेल परियोजना अब निर्माण के चरण में प्रवेश कर चुकी है। पीआईबी से मंजूरी के बाद एनसीआरटीसी द्वारा दिल्ली सेक्शन में कश्मीरी गेट से भलस्वा तक इलेक्ट्रिकल यूटिलिटी शिफ्टिंग का पहला बड़ा तकनीकी टेंडर जारी किया गया है, जिसके लिए फंड भी रिलीज हो चुका है।
इस हाई-स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर के शुरू होने से जहां सराय काले खां से करनाल का सफर 90 मिनट और दिल्ली से मुरथल की दूरी करीब आधे घंटे में तय होगी, वहीं सोनीपत सेक्शन में ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और निजी वाहनों की निर्भरता में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
पीआईबी मंजूरी के बाद पहला बड़ा तकनीकी टेंडर
नवंबर 2025 में पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद यह आरआरटीएस परियोजना का पहला बड़ा तकनीकी टेंडर है। इससे साफ हो गया है कि अब आरआरटीएस केवल योजना नहीं, बल्कि एक सक्रिय निर्माण परियोजना बन चुकी है।
160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से मिनटों में सफर
आरआरटीएस ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके शुरू होने के बाद यात्रा काफी आसान होगी और समय की भी बचत होगी।
दिल्ली से सोनीपत का 25–30 मिनट में सफर।
दिल्ली से पानीपत का करीब 45 मिनट में सफर।
सराय काले खां से करनाल का 90 मिनट में सफर।
दिल्ली से मुरथल की लगभग 30 मिनट में यात्रा संभव हो सकेगी।
नया टेंडर क्यों अहम
कश्मीरी गेट से भलस्वा सेक्शन में जारी टेंडर के तहत हाईटेंशन लाइन, अंडरग्राउंड केबल, ट्रांसफॉर्मर और अन्य विद्युत ढांचे को शिफ्ट किया जाएगा। यह काम इसलिए जरूरी है ताकि आगे पिलर, स्टेशन और ट्रैक निर्माण में कोई तकनीकी बाधा न आए। इस कार्य को एक वर्ष में पूरा करना अनिवार्य होगा।
दिल्ली सेक्शन पूरा होते ही हरियाणा में तेज़ होगी निर्माण गतिविधि
दिल्ली सेक्शन में यूटिलिटी शिफ्टिंग पूरी होते ही सोनीपत और पानीपत सेक्शन में सर्वे, पाइलिंग और निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना हरियाणा सरकार और एनसीआर प्लानिंग में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर बूस्टर के रूप में देखी जा रही है।
दिल्ली–पानीपत–करनाल संभावित स्टेशन
इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 136 किमी होगी, जिसमें करीब 100 किमी हरियाणा और 36 किमी दिल्ली में प्रस्तावित है। दिल्ली–गुरुग्राम–बावल नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई 92 किमी होगी, जिसमें 22 किमी दिल्ली और 71 किमी हरियाणा में प्रस्तावित है। इस रूट पर 17 स्टेशन होंगे और दिल्ली से बावल का सफर करीब 60 मिनट में पूरा होगा।
शहरी और औद्योगिक इलाकों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर
इस कॉरिडोर का अलाइनमेंट हरियाणा के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। मुरथल, कुंडली, बहालगढ़, गन्नौर, पानीपत और करनाल जैसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ने से उद्योग, शिक्षा और रियल एस्टेट गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा के औद्योगिक और शिक्षा हब को मिलेगा सीधा फायदा
दिल्ली–पानीपत–करनाल कॉरिडोर हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर और शैक्षणिक केंद्रों को जोड़ता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र का संतुलित और तेज विकास सुनिश्चित होगा।
सोनीपत सेक्शन पर सबसे पहले दिखेगा असर
इस कॉरिडोर का सबसे अधिक असर हरियाणा के सोनीपत जिले में देखने को मिलेगा। आरआरटीएस रूट को एनएच-44 के समानांतर विकसित किया जाएगा, जिससे कुंडली, बहालगढ़, मुरथल, बरही, गन्नौर जैसे इलाकों में आवाजाही पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में दिल्ली–सोनीपत के बीच रोजाना घंटों जाम झेलने वाले यात्रियों को तेज़ और भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।