चंडीगढ़ मेयर हरप्रीत कौर बबला और नगर निगम कमिश्नर ने जिस एनिमल कारकस इनसिनरेटर प्लांट का उद्घाटन किया, वह चार महीने बाद ही बंद हो गया। नतीजा यह निकला कि सात दिन से यहां पर आस पास से आने वाली करीबन 50 मृतक गाय का संस्कार नहीं हो सका। नगर निगम ने गाय के संस्कार मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मेडिकल अफसर ऑफ हेल्थ डॉ इंद्रदीप कौर को सस्पेंड कर दिया है।
वेटरनरी डॉक्टर व प्लांट इंचार्ज डॉक्टर रविंदर सिंह धालीवाल, सेनेटरी इंसपेक्टर राम लाल सिंह, सुपरवाइजर लवली और अन्य मल्टी टास्किंग स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया गया है। नगर निगम करीबन 25 छोटे बड़े अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। कारकस प्लांट के बरामदे में मृत गाय के शव लावारिस पड़े होने पर मौके पर पहुंचे समाज सेवियों ने खूब हंगामा किया था।
तब जाकर सोया हुआ प्रशासन जागा, मेयर हरप्रीत कौर बबला, नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार और डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव मौके पर पहुंचे।अभी भी कई सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब के लिए अब जांच कमेटी बना दी गई है। प्रशासक यह पता लगाने के लिए कि गाय की मौत कैसे हुई, गाय का पोस्टमॉर्टम करवाएगा ओर आगे की जांच की जाएगी।
बहरहाल देर रात तक मखनमाजरा की गोशाला और कारकस प्लांट पर काम करने वाले 23-25 कर्मचारियों को सस्पेंड करने की कार्रवाई होने का दावा मेयर हरप्रीत कौर बबला की तरफ से किया गया। मगर इसके लिखित में ऑर्डर जारी नहीं किए गए हैं।
गाय की मौत के कारणों और इतने शव कहां से आए जांच होगी
डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव का कहना है कि कारकस प्लांट की मशीन कब से खराब थी, क्यों खराब थी और इसे ठीक क्यों नहीं करवाया गया। यह तो जांच का विष्य है हीं, हम यह भी जांच करवा रहे हैं कि इन गाय की मौत कैसे हुई है। कहां पर हुई।
हम गाय का पहले पोस्टमॉर्टम करवाएंगे और इनकी मौत का कारण पता लगने के बाद ही इनका संस्कार किया जाएगा। यही नहीं हम नगर निगम की कार्य प्रणाली की भी जांच करवा रहे हैं।