करनाल, 8 जनवरी।
यहां के महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय व प्रदेश के बागवानी विभाग द्वारा चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से आज सीएसएसआईआर में बागवानी अधिकारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन हरियाणा के किसान एवं कृषि कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा द्वारा किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान फसल विविधीकरण अपनाकर बागवानी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदेश करीब 4 लाख 18 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसलों का उत्पादन कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के फल एवं सब्जी के उत्कृष्ट केंद्रों पर 14 बागवानी विज्ञान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
कार्यशाला के उदघाटन सत्र की शुरूआत दीप प्रज्वलित करके की गई। कृषि मंत्री को पुष्प-गुच्छ देकर स्वागत किया। श्री राणा ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2024-25 में राज्य में फलों के अंतर्गत 73153 और सब्जियों के अंतर्गत 334281 हेक्टेयर क्षेत्रफल था। इस अवधि में सब्जियों का उत्पादन 5856938 मीट्रिक रहा। आलू उत्पादन में कुरुक्षेत्र जिला सबसे आगे है। फूलों की फसल के अंतर्गत क्षेत्रफल 1584 हेक्टेयर है जिसमें मुख्य रूप से गेंदा, रजनीगंधा, गुलाब, गुलदाउदी, ग्लाडिओलस की खेती की जाती है। गुरुग्राम जिला में गेंदे का क्षेत्रफल सबसे अधिक है लेकिन उत्पादन में सोनीपत जिला अग्रणी है। राज्य के किसान औषधीय व मसाला फसलों की ओर भी अग्रसर हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि दिल्ली के तीन ओर हरियाणा की सीमाएं लगती हैं। इसी कारण यहां बागवानी उत्पादों की खपत अधिक है और कीमत भी अच्छी मिलती है। लेकिन विकास के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। कृषि विश्वविद्यालय मुख्य रूप से खाद्यान्न फसलों पर केंद्रित रहे हैं जबकि बागवानी में फल-सब्जियों, फूल, मसाले, मशरूम, औषधीय पौधों के लिए अलग-अलग वैज्ञानिक समाधान चाहिए। बागवानी फसलों से पारंपरिक फसलों के मुकाबले अधिक आय होती है। राज्य में बागवानी वैज्ञानिकों, नर्सरी मैनेजरों, पोस्ट-हार्वेस्ट विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है। माइक्रो-सिंचाई व संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने के लए शोध एवं तकनीकी मार्गदर्शन जरूरी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय और प्रदेश के बागवानी अधिकारियों के उचित तालमेल और सांझे प्रयासों से प्रदेश में फसल विविधीकरण की गति तेज होगी। फल, सब्जी, फ्लोरीकल्चर और औषधीय पौधों के एक्सपोर्ट क्लस्टर विकसित होंगे। ग्रामीण युवाओं के लिए नर्सर, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और एग्री स्टार्टअप में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। श्री राणा ने कहा कि टीम-वर्क के साथ आगे बढ़ना होगा। हर विभाग, क्षेत्र व हर व्यक्ति को 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिए सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। बागवानी विभाग को भी भावी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनानी होंगी।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार ने 24 फसलों के लिए एमएसपी घोषित किया है। किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए भावांतर योजना शुरू कर रखी है। धान घोटाले संबंधी एक प्रश्न पर कहा कि इससे किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। घोटाले में लिप्त लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। कृषि मंत्री ने बागवानी पत्रिका, वार्षिक केलेंडरी और विभाग के योजनाओं से संबंधित तीन ब्रोशर का विमोचन भी किया।
कार्यशाला में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय के कुलपति एसके मल्होत्रा, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान के निदेशक डा. राजवीर गर्ग, बागवानी विभाग के महानिदेशक डा. रणबीर सिंह, अध्यक्ष डॉ. अर्जुन सैनी, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के आरके यादव, बागवानी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डा. धर्मपाल चौधरी ने भी विचार रखे। मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
इस मौके पर मिशन डायरेक्टर डा. जोगेंद्र सिंह के अलावा विभिन्न जिलों के आए एसडीओ स्तर व उच्च स्तर के अधिकारी मौजूद रहे।