कांग्रेस की टिकट खिड़की पर फंसे हाथों से की तुलना, टिकट बंटवारे पर कसा तंज
फरीदाबाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस संगठन पर सवाल खड़े किए हैं। हरियाणा में कांग्रेस की चुनावी हार का सबसे बड़ा कारण संगठन का अभाव रहा। बीरेंद्र सिंह ने दावा किया कि करीब 11 साल तक पार्टी में ब्लॉक स्तर तक संगठन नहीं बना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता सिर्फ टिकट बांटने में लगे रहे और संगठन पर ध्यान नहीं दिया गया। टिकट बंटवारे पर तंज कसते हुए उन्होंने इसे टिकट खिड़की पर फंसे हाथों से तुलना की।
-कांग्रेस के नेता सिर्फ टिकट बांटने में लगे, संगठन था ही नहीं
कांग्रेस की सद्भावना यात्रा की सफलता को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह रविवार को फरीदाबाद पहुंचे। जहां उन्होंने कांग्रेसी नेताओं के साथ यात्रा को लेकर बैठक की। बैठक में अपने संबोधन के दौरान बीरेंद्र सिंह ने कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण करीब 11 साल तक संगठन नाम की कई चीज होना नहीं था। कांग्रेस के नेता सिर्फ टिकट बांटने में लगे हुए थे। बाकी कांग्रेस का संगठन नहीं था। ऐसे में पार्टी की हार का यही सबसे बड़ा कारण बन गया।
– टिकट लेने वालों की भीड़ ज्यादा लग गई, जिसके कारण टिकट नहीं निकल पाई
बीरेंद्र सिंह ने विधानसभा चुनाव मे हुए टिकट बंटवारे को लेकर भी कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में टिकट को लेकर वैसा हाल हुआ, जैसे वो कई बार पांच आने में टिकट लेकर वे मूवी देखने के लिए जाते थेत्र लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण खिड़की के छोटे से होल में कई हाथ फंस जाते थे। जिसके कारण टिकट बाहर नहीं निकल पाती थी। कांग्रेस में भी ऐसा ही हुआ, टिकट लेने वालों की भीड़ ज्यादा लग गई, जिसके कारण टिकट नहीं निकल पाई।
बीजेपी के पास भी संगठन नहीं
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि बीजेपी के पास भी संगठन नहीं है, वो खुद बीजेपी में 10 साल रहकर आए है, इसलिए उनको पता है कि पन्ना प्रमुख के नाम पर बीजेपी फर्जी आंकड़ा पेश कर रही है। हकीकत में नहीं, लेकिन कागजों में उनका संगठन है।
कांग्रेस को उनके ही नेताओं ने हराया
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने जिसको टिकट दे दी वो कांग्रेस में रह गया। जिसको टिकट नहीं मिली या तो वो बैठ गया। इसके अलावा उसने विरोध करना शुरू कर दिया। इसके अलावा कांग्रेस कंडीडेट के मुकाबले में खड़ा हो गया। ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि कांग्रेस का कोई संगठन नहीं था।