January 4, 2026
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29 जनवरी काे चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के चुनाव हाेने जा रहे है । इस बार चुनाव हाथ खड़े कर कराया जाएगा। जिससे क्रॉस वोटिंग की आशंका नहीं रहेगी। जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने पार्षदों को भाजपा में जाने से रोकना बन गई है।

2021 में 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी अाप अब तक केवल एक बार ही मेयर बना पाई है। मौजूदा हालात को देखते हुए चंडीगढ़ प्रभारी एसएस आहलूवालिया ने राष्ट्रीय प्रभारी जरनैल सिंह के साथ बैठक की।

बैठक में पार्षदों की मौजूदा स्थिति और पार्टी छोड़कर भाजपा में गए नेताओं को लेकर चिंता जताई गई। जरनैल सिंह ने दो पार्षदों के भाजपा में जाने पर नाराजगी जाहिर की और बचे हुए पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दिया।

-कांग्रेस और अाप के पास सांसद के वोट को मिलाकर भाजपा के बराबर वोट
कांग्रेस और अाप के पास सांसद के वोट को मिलाकर भाजपा के बराबर वोट हैं। ऐसे में मेयर पद के लिए दोनों खेमों को महज एक अतिरिक्त पार्षद की जरूरत है। यही वजह है कि जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। अाप ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 36 में से 14 सीटें जीती थीं, लेकिन बहुमत नहीं जुटा सकी।

अब तक चुने गए चार मेयर में से तीन बार भाजपा का मेयर बना है। अाप के कुलदीप कुमार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक मात्र मेयर बने है। दिसंबर 2021 के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए। भाजपा ने जोड़-तोड़ की राजनीति में बढ़त बना ली है।

-नगर निगम का मौजूदा कार्यकाल 2026 में खत्म
नगर निगम का मौजूदा कार्यकाल 2026 में खत्म हो रहा है। एक साल की मेयर शिप के इस आखिरी वर्ष में अाप के लिए मेयर बनाना बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के समर्थन के बावजूद पार्टी अब तक लगातार चूकती रही है। इस बार मुकाबला सिर्फ एक वोट पर टिका है।

Via : NetaJi