राकेश टिकैत बोले—खेती घाटे का सौदा नहीं, दिल्ली की कलम बेईमान है
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : सोनीपत की छोटू राम धर्मशाला में गन्ने के भाव में बढ़ोतरी, सोनीपत शुगर मिल के नवीनीकरण तथा शुगर मिल के टेंडर सहित किसानों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेते हुए अपनी समस्याओं और मांगों को मजबूती से उठाया। महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत, राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह सहरावत, भारतीय किसान यूनियन हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी रतन मान, भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दलजीत सिंह डागर, महाराष्ट्र किसान यूनियन अध्यक्ष चंद्रशेखर पाटिल, वरिष्ठ किसान नेता विजेंद्र, जिला सोनीपत अध्यक्ष वीरेंद्र पहल सहित अनेक किसान नेताओं और किसानों ने भाग लिया। महापंचायत के दौरान किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जिला सोनीपत शुगर मिल की एमडी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों से बातचीत करते हुए उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने तथा शीघ्र समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
खेती घाटे का सौदा नहीं, नीतियां खेती को घाटे में धकेल रही हैं
राकेश टिकैत महापंचायत को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि खेती अपने आप में घाटे का सौदा नहीं है। किसान मेहनत और ईमानदारी से देश के लिए अन्न पैदा करता है, लेकिन ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं जिनके कारण किसान को उसकी मेहनत और फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि “खेती किसानी घाटे का सौदा नहीं है, अगर बेईमान है तो दिल्ली की सरकारों की कलम बेईमान है, जो ऐसी नीतियां बना रही है जिससे खेती को घाटे का सौदा बना दिया गया है।” राकेश टिकैत ने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने संगठन को गांव स्तर से लेकर ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर तक मजबूत करें। उन्होंने कहा कि संगठन ही वह शक्ति है जिसके माध्यम से किसान अपनी मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचा सकते हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो किसानों को बड़े धरने और आंदोलन के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
80 साल बाद भी किसान की हालत चिंताजनक
युद्धवीर सहरावत भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह सहरावत ने महापंचायत को संबोधित करते हुए किसानों की आर्थिक स्थिति और सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी किसान अपने अधिकारों और उचित मूल्य के लिए संघर्ष कर रहा है। देश में करोड़ों किसान परिवार हैं, लेकिन इसके बावजूद किसान कर्ज, बढ़ती कृषि लागत और फसलों के उचित मूल्य जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। युद्धवीर सहरावत ने कहा कि किसानों और बड़े व्यापारिक घरानों के प्रति नीतियों में समानता होनी चाहिए। उन्होंने बड़े कर्जों और ऋण निपटान से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि बड़े आर्थिक हितों के लिए हजारों करोड़ रुपये की व्यवस्था की जा सकती है, तो किसानों के कर्ज और उनकी आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए समान संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई जाती? उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सरकार को किसान हित में स्पष्ट एवं न्यायपूर्ण नीति बनानी चाहिए। भूमि व्यवस्था को लेकर भी उठाए सवाल युद्धवीर सहरावत ने भूमि संबंधी व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों के लिए भूमि रखने को लेकर अलग-अलग सीमाएं और नियम हैं, जबकि बड़ी पूंजी वाली कंपनियां विभिन्न कानूनी माध्यमों से बड़ी मात्रा में भूमि पर नियंत्रण स्थापित कर सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक देश में किसानों और पूंजीपतियों के लिए अलग-अलग नियम क्यों हों? किसानों के लिए भी ऐसी नीति होनी चाहिए जिसमें उनके अधिकार और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में किसान लगातार कमजोर होता जा रहा है और यदि समय रहते नीतियों में सुधार नहीं किया गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। “किसानों को संगठित होकर अपनी लड़ाई लड़नी होगी”—रतन मान भारतीय किसान यूनियन हरियाणा प्रदेश के अध्यक्ष चौधरी रतन सिंह मान ने कहा कि किसानों को अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संगठित होकर मजबूती से संघर्ष करना होगा। किसान संगठनों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर किसान हित के मुद्दों पर एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की मांगों का समाधान नहीं करती तो किसान संगठनों को मजबूती से आवाज उठानी होगी और आवश्यकता पड़ने पर सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी करना पड़ेगा।
सरकार की भेदभावपूर्ण नीति के कारण किसान आंदोलन को मजबूर
दलजीत सिंह डागर भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष चौधरी दलजीत सिंह डागर ने कहा कि सरकारों की भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण ही किसान आज सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर है। उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य, कृषि लागत के अनुरूप लाभकारी भाव और समय पर भुगतान मिलना चाहिए। किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस नीति और धरातल पर कार्रवाई से होना चाहिए। महापंचायत में इन प्रमुख मुद्दों पर हुई चर्चा महापंचायत में किसानों ने मुख्य रूप से— – गन्ने के भाव में बढ़ोतरी। – सोनीपत शुगर मिल के नवीनीकरण। – शुगर मिल के टेंडर में पारदर्शिता। – किसानों की फसलों का उचित एवं लाभकारी मूल्य। – कृषि लागत को कम करने के प्रभावी उपाय।
किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने
किसान हितैषी एवं समान नीति बनाने। – किसानों की समस्याओं के शीघ्र समाधान। जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए। मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन महापंचायत के दौरान किसानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम सौंपा गया। शुगर मिल प्रबंधन की ओर से एमडी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों से बातचीत की और किसानों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। साथ ही मांगों के शीघ्र समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई। किसान नेताओं ने दिया एकजुटता का संदेश महापंचायत में उपस्थित किसान नेताओं ने कहा कि किसान अलग-अलग क्षेत्रों और संगठनों में बंटकर अपनी ताकत कमजोर न करें। किसान हित से जुड़े मुद्दों पर सभी किसान संगठनों को एक मंच पर आकर संघर्ष करना होगा। महापंचायत में प्रमुख रूप से चौधरी राकेश टिकैत, चौधरी युद्धवीर सिंह सहरावत, चौधरी रतन मान, चौधरी दलजीत सिंह डागर, चंद्रशेखर पाटिल, विजेंद्र, वीरेंद्र पहल, विजेंद्र महारा, मुकेश दहिया, दलबीर मदीना, जिला उपप्रधान मनोज छिक्कारा, जिला महासचिव सुंदर पंवार, महासचिव अनिल, जसमेर, रणबीर नम्बरदार, राजबीर सिंह, भारतीय किसान यूनियन जिला झज्जर के अध्यक्ष कुलदीप पंघाल, महासचिव आशीष डबास, अजय डबास सहित अनेक किसान नेता और किसान मौजूद रहे।