- मैं जनता के साथ, लड़ने-मरने को तैयार
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज राज्य के अफसरों और अपनी सरकार की प्रस्तावित पॉलिसी से नाराज हैं। विज ने गुरुवार को अंबाला में अपने समर्थकों की आनन-फानन मीटिंग बुला ली। इसमें सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मेरी राय लिए बगैर अंबाला कैंट की फ्री-होल्ड पॉलिसी बना दी गई। इसे कैबिनेट मीटिंग में पास कराने की तैयारी भी हो चुकी थी, मगर मैंने इसे डेफर (टाला) करवाया। विज यहीं नहीं रुके। आगे बोले- अब 3 विकल्प हैं। पहला- उम्मीद है कि पॉलिसी में जो गलत बातें हैं, मैं उसे सरकार से ठीक करवा दूं। दूसरा- इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े। तीसरा- सरकार से लड़ना पड़ जाए। अगर ऐसा हुआ तो मैं सरकार के साथ नहीं बल्कि जनता के साथ मिलकर लड़-मरूंगा। बता दें कि 28 जुलाई को CM नायब सैनी की अध्यक्षता में कैबिनेट की मीटिंग हुई। इसमें लाए गए 26 में से 22 एजेंडे पास हो गए। जो 4 एजेंडे टाले गए, उनमें शामिल एजेंडा नंबर-17 अंबाला कैंट की फ्री-होल्ड पॉलिसी से जुड़ा था। इसी को लेकर विज अपनी सरकार से खफा हैं।
फ्री-होल्ड पॉलिसी में कई गलत प्रावधान
विज ने कहा- हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने फ्री-होल्ड पॉलिसी बनाई, लेकिन इसमें कई प्रावधान ऐसे हैं जो लोगों के हित में नहीं है। कैबिनेट बैठक में अफसरों ने इस पॉलिसी को मंजूर कराने की कोशिश की, लेकिन मैंने सीएम से चर्चा की डिमांड करते हुए एजेंडा स्थगित करा दिया।
मेरी राय लिए बिना बना दी पॉलिसी
विज बोले- मैंने मीटिंग में सीएम साहब से कहा कि अम्बाला कैंट की लैंड पॉलिसी बनाई जा रही है और मैं अम्बाला कैंट का विधायक हूं लेकिन मुझसे एक बार भी इस बारे में पूछा नहीं गया। मैं एक बार नहीं, सात बार से MLA हूं। इस पॉलिसी में क्या है? क्या नहीं है? अम्बाला के लोग क्या चाहते हैं? इस पर एक बार भी मुझसे पूछा नहीं गया।
मैं चीफ सेक्रेटरी के सामने अड़ गया
विज ने समर्थकों से कहा- कैबिनेट मीटिंग में चीफ सेक्रेटरी ने इस पॉलिसी से जुड़े एजेंडे को पास करने के लिए कहा, लेकिन मैंने अड़ते हुए इसे डेफर करने को कहा। मैंने सीएम से भी कह दिया कि आप इस मसले पर मीटिंग बुला लो। उसमें मुझे बुला लें और उन सभी लोगों को भी बुला लें, जिन्होंने पॉलिसी बनाई है। सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला ले लिया जाए।
बैठक में ना जाता तो एजेंडा पास हो जाता
विज ने कहा- अगर मैं अपनी बीमारी के चलते 28 जुलाई को हुई उस कैबिनेट मीटिंग में न जाता तो ये एजेंडा पास हो जाता। और अगर ऐसा हो जाता तो आज अम्बाला के लोग सड़कों पर धक्के खा रहे होते। उल्लेखनीय है कि कैबिनेट मिनिस्टर अनिल विज की एक आंख में दिक्कत चल रही है। उन्हें ये आंख खोलने में मुश्किल होती है। वह इसका इलाज करवा रहे हैं।
लोगों को करोड़ों रुपए देने पड़ेंगे
विज के मुताबिक, उन्होंने इस पॉलिसी का ड्रॉफ्ट 3 वकीलों से चेक करवाया। अंबाला कैंट की जमीन को फ्री-होल्ड कराने के लिए कलेक्टर रेट के आधार पर पूरी रकम जमा कराने का प्रावधान है। यानी यदि किसी के पास 1000 वर्ग गज जमीन है और वहां का कलेक्टर रेट 60 हजार रुपए प्रति वर्गगज है तो उसे 6 करोड़ रुपए सरकार को चुकाने होंगे।
मूल दस्तावेज कहां से लाएंगे
किसी भी शख्स को रजिस्ट्री कराने के लिए जमीन के ओरिजनल डाक्यूमेंट (मूल दस्तावेज) जमा कराने होंगे। अगर ओरिजनल डाक्यूमेंट सौ–डेढ़ सौ साल पहले यानि दादा–पड़दादा के टाइम के हुए तो पुराने समय में बड़े–बुजुर्ग जुबानी बंटवारा कर देते थे। ऐसे परिवार अब कागज कहां से लाएंगे।
पैसे न देने पर प्रॉपर्टी सरकार की हो जाएगी
प्रस्तावित पॉलिसी के मुताबिक 25% रकम जमा कराने के साथ पोर्टल पर आवेदन करना होगा। एक साल के अंदर सारा पैसा जमा न कराने पर सरकार प्रॉपर्टी को सील कर सकेगी। अगर फ्री होल्ड कराने के लिए पोर्टल पर अप्लाई नहीं किया तो एक साल बाद उस मकान पर ताला लगाकर मार्केट रेट पर किराया वसूला जाएगा।