February 24, 2026
24 FEB 7
  • देश का पहला ऑटोमैटिक डिलीवरी सिस्टम लॉन्च
  • जाम से राहत, पर्यावरण सुधरेगा

ह​रियाणा : ब्रेकिंग न्यूज : गुरुग्राम में देश का पहला पूरी तरह से ऑटोमैटिक ‘फिजिकल AI’ डिलीवरी नेटवर्क कमर्शियल तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। अब सेक्टर 102 के निवासियों को अपना खाना या सामान किसी डिलीवरी बॉय से नहीं, बल्कि ड्रोन और एआई आधारित रोबोट से प्राप्त होगा।

सोमवार से इस नेटवर्क ने कमर्शियल काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां ड्रोन और रोबोट सामान पहुंचा रहे हैं। दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के बाद इस सिस्टम को गुरुग्राम में लॉन्च किया गया है। माना जा रहा है कि इससे गुरुग्राम की सड़कों पर आने वाले समय से जाम और पर्यावरण प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।

ऐसे काम करेगा काम

सेक्टर 102 में 4 आधुनिक AI सिस्टम स्काई पोर्ट, स्काई शिप, अराइव पॉइंट और ऑटोनामी के ‘ऑटोबॉट्स’ एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस नेटवर्क की सबसे खास बात यह है कि इसमें सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए इंसानों की जरूरत नहीं पड़ती।

गुरुग्राम में फिजिकल AI इंफ्रास्ट्रक्चर की शुरुआत

स्काई एयर मोबिलिटी के CEO अंकित कुमार ने बताया कि यह सिर्फ ड्रोन की क्षमता का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह शहर के स्तर पर फिजिकल AI इंफ्रास्ट्रक्चर की शुरुआत है। भारत हमेशा से सॉफ्टवेयर में आगे रहा है, लेकिन आज अपनी ताकत से दिखा दिया कि भारत असली दुनिया में सामान पहुंचाने वाली AI तकनीक में भी लीडर हैं।

सुरक्षित और बिना रूकावट के काम

अराइव एआई के सीईओ डैन ओटोल ने बताया कि अराइव पॉइंट्स हवा और जमीन के बीच एक पुल का काम करते हैं। ये स्मार्ट मेलबॉक्स सुनिश्चित करते हैं कि ड्रोन और रोबोट के बीच सामान का लेन-देन सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के हो।

अंदर और बाहर आसानी से चलेंगे रोबोट

ओटोनोमी इंक के सीईओ रितुकर विजय ने बताया कि ये ऑटोबॉट्स घरों के अंदर और बाहर दोनों जगह आसानी से चल सकते हैं। स्काई एयर और अराइव के साथ मिलकर हम दुनिया को दिखा रहे हैं कि भविष्य की लॉजिस्टिक्स कितनी आसान होगी।

पर्यावरण के लिए भी वरदान

यह प्रोजेक्ट केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। इस नेटवर्क को लॉन्च करने वाली स्काई एयर के मुताबिक पिछले 2 सालों में उन्होंने 36 लाख से ज्यादा ऑटोनॉमस डिलीवरी की हैं, जिससे करीब एक हजार टन कार्बन उत्सर्जन (CO2) कम हुआ है।

यह सिस्टम ट्रैफिक जाम को कम करने और सड़कों पर गाड़ियों का बोझ घटाने में भी मदद करेगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में पूरी दुनिया के शहरों में डिलीवरी का यही तरीका अपनाया जा सकता है।