January 28, 2026
28 jan 2
  • झज्जर में नेता ने पार्टी छोड़ी, योगेश्वर-विजेंदर ने भी उठाया झंडा

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) के नए नियमों का हरियाणा में भी विरोध शुरू हो गया है। BJP नेता व ओलिंपियन रेसलर योगेश्वर दत्त ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से दो दिन में 3 पोस्ट कर इस एक्ट पर विरोध दर्ज कराया।

योगेश्वर ने लिखा- “भरी सभा में द्रौपदी चीरहरण के समय बड़े-बड़े योद्धाओं ने चुप्पी साधी। जिस सत्ता-कुर्सी के लालच में यह किया, न वह सत्ता रही, न कुर्सी। सभी का सर्वनाश हो गया।”

वहीं, ओलिंपियन बॉक्सर और भाजपा नेता विजेंदर सिंह ने X पर लिखा- “शिक्षा समान अवसर का माध्यम होनी चाहिए, न कि समाज को बांटने का।”

उधर, नए नियमों के विरोध में मंगलवार को झज्जर में छारा मंडल की महिला मोर्चे की अध्यक्ष मनीषा शर्मा ने इस्तीफा दे दिया। मनीषा शर्मा खरहर गांव में पंचायत में वार्ड 10 से मेंबर भी हैं। इसके अलावा, यमुनानगर में आज इसके खिलाफ प्रदर्शन भी है।

सोशल मीडिया पर सपोर्ट के साथ ट्रोलिंग भी
सोशल मीडिया पर योगेश्वर दत्त की पोस्ट को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। सवर्ण समुदाय से जुड़े यूजर भाजपा से होने के बावजूद UGC एक्ट के विरोध का सपोर्ट करने के लिए उनका बड़ा कदम बता रहे हैं। वहीं, किसान आंदोलन व पहलवान आंदोलन से जुड़े लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं।

विजेंद्र सिंह बोले- जातिगत वर्गीकरण में मत बांटिए

भिवानी के रहने वाले ओलिंपियन बॉक्सर विजेंदर सिंह ने अपनी X पोस्ट में लिखा – “शिक्षा समान अवसर का माध्यम है, जातिगत विभाजन का नहीं। UGC का छात्रों को वर्गों में बांटने वाला यह निर्णय देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है। कक्षा में बैठा युवा ही देश का भविष्य है, कृपया इसे जातिगत वर्गीकरण में मत बांटिए। शिक्षा का मूल उद्देश्य अवसर प्रदान करना है। UGC को फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेना चाहिए।”

शर्मा बोलीं- शैक्षणिक असमानता बढ़ेगी

भाजपा की कार्यकर्ता मनीषा शर्मा ने यूजीसी एक्ट-2026 के विरोध में पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मनीषा हरियाणा में झज्जर के खरहर गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि इस नए यूजीसी एक्ट से शैक्षणिक असमानता बढ़ेगी और संविधान के अनुच्छेद 14 (समान नागरिकता का अधिकार) का उल्लंघन होगा, इसलिए उन्होंने संविधान और शिक्षा के हित में यह निर्णय लिया है। उनका यह कदम निजी कारणों से नहीं, बल्कि नीति और सिद्धांतों पर आधारित विरोध के रूप में है।