- कहा- गृहिणी सिर्फ देखभाल नहीं करती, पूरा घर संभालती, हादसे में पति की गई थी जान
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में पति की मौत पर मुआवजा को लेकर अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने गृहिणी की भूमिका और उसके आर्थिक योगदान को स्वीकार करते हुए पीड़ित परिवार को मिलने वाला मुआवजा दोगुना कर 1.18 करोड़ रुपए कर दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बढ़ती महंगाई और लगातार मुद्रास्फीति को देखते हुए गृहिणी की काल्पनिक आय 15 हजार रुपए प्रतिमाह आंकना पूरी तरह उचित है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के 2016 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें पीड़ित परिवार को 58.22 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्णय लिया गया था।
गृहिणी का काम सिर्फ देखभाल तक सीमित नहीं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी गृहिणी द्वारा दी जाने वाली सेवाएं खुले बाजार से ली जाएं, तो इसके लिए पर्याप्त पारिश्रमिक देना पड़ेगा। कोर्ट ने माना कि गृहिणी की भूमिका केवल बच्चों या परिवार की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें घरेलू प्रबंधन, वित्तीय योजना, बजट बनाना, बच्चों की शिक्षा, किराने और घरेलू जरूरतों की खरीद, बुजुर्गों की देखभाल और घर से जुड़ी कई जिम्मेदारियां शामिल होती हैं।
ट्रिब्यूनल ने आय का गलत आकलन किया
कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने गृहिणी की आय का आकलन कम करके सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के विपरीत गलती की। एक पुराने मामले में गृहिणी की काल्पनिक आय 9 हजार रुपए मासिक मानी गई थी, जबकि वर्तमान मामला वर्ष 2014 की दुर्घटना से जुड़ा है। ऐसे में बढ़ती जीवन-यापन लागत और गृहिणियों के आर्थिक योगदान की न्यायिक मान्यता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पीड़ा और कष्ट के मुआवजे में भी बढ़ोतरी
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि ट्रिब्यूनल ने पीड़ा और कष्ट (Pain and Suffering) के मद में कम मुआवजा दिया था। कोर्ट ने कहा कि स्थायी दिव्यांगता केवल शारीरिक क्षमता को ही नहीं, बल्कि पीड़ित और उसके परिवार के पूरे जीवन को प्रभावित करती है।
सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली और 2016 के आदेश को संशोधित करते हुए मुआवजे की राशि 58.22 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.18 करोड़ रुपए कर दी।