- पिता से छीपकर करती थी प्रैक्टिस, हाथ जले, कंधा टूटा, फिर शादी हुई हर बार कमबैक किया
भिवानी की पूजा बोहरा नेशनल लेवल पर सीनियर कैटेगरी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गई हैं। पहले भिवानी की ही कविता चहल के नाम यह रिकॉर्ड रहा। उन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते।
ग्रेटर नोएडा में 10 जनवरी को समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पूजा ने 75-80 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया। नैना यूथ चैंपियन रही हैं। प्रतियोगिता के बाद मंगलवार को भिवानी लौटी पूजा का जोरदार स्वागत हुआ।
पूजा का यहां का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। शुरुआत में परिवार से छिपकर बॉक्सिंग प्रैक्टिस की। फिर दिवाली पर हाथ में पटाखा फट गया। हाथ जल गए। उसके बाद कंधे में चोट लगी। यही नहीं, पूजा शादी के बाद फिर रिंग में लौटीं। हर बार कमबैक किया।
महसूस करो कि हमसे अच्छा कोई नहीं
पूंजा ने कहा- कोच संजय श्योराण काफी अच्छी टेक्नीक सिखाते हैं। वे माइंड भी ऐसा बना देते हैं कि हमें यह लगता है कि हमसे अच्छा कोई नहीं है। स्टार्टिंग में भी ऐसा ही था कि मुझे एक साल में ही यूं लगने लग गया था कि मेरे से अच्छा कोई नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे रियल बॉक्सिंग को फेस किया तब लगा कि लगातार मेहनत की जरूरत है।
मेडल आने लगे तो सबका नजरिया बदला
उन्होंने कहा कि स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अच्छे दिनों की शुरुआत हुई। लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। नेशनल में शुरुआत के एक साल मेडल नहीं जीत पाई। इसके बाद धीरे-धीरे मेडल आने स्टार्ट हो गए।
फैमिली का सपोर्ट है तो हर लड़ाई आसान
पूजा ने कहा कि फैमिली सपोर्ट कर रही हो तो बाकी कुछ मैटर नहीं करता। शुरुआत में परिवार को लगता था कि बॉक्सिंग खेल खतरनाक है। कहीं चोट न लग जाए, लेकिन बाद में बहुत सपोर्ट मिला। जब कभी 17 साल के सफर को देखती हूं तो लगता है कि खिलाड़ी के लिए सबसे मुश्किल टाइम वह होता है, जब वह करना चाहता है और कर नहीं पा रहा। जैसे कोई इंजरी हो जाए।
जो ठान लो, उसे करके दिखाओः आखिर में उन्होंने कहा कि जो लड़की खिलाड़ी बनना चाहती हैं, उनको के लिए बस यही राय है कि जो ठान लो, उसे करके दिखाओ। आजकल परिवार काफी जागरूक हो चुके हैं। यह देखना चाहिए कि कौन कोच अच्छे हैं और कौन-सी एकेडमी अच्छी है। यह अच्छे से निर्णय लेकर ही अपना गेम स्टार्ट करना चाहिए।